जयपुर। सिरसी रोड, वैशाली नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष चिकित्सा मंत्र आराधनम् में रविवार को ज्योतिष का दिव्य दरबार सजाया गया। ज्योतिष दरबार में देश के अलग-अलग राज्यों से ज्योतिष, चिकित्सा और वास्तु से जुड़े सैकड़ो लोगों उपस्थित हुए।
ज्योतिष दरबार अयोध्या से आए श्रीमद जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर महाराज के सान्निध्य में हुआ। कार्यक्रम का आयोजन सुबह सवा 10 बजे प्रारंभ हुआ और इसका समापन शाम 4 बजे किया गया। इस कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस भव्य आयोजन में देशभर से आए संत-महंत, ज्योतिष चिकित्सा विशेषज्ञ, हस्तरेखा विशेषज्ञ, वास्तुकार, प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ, फिंगरप्रिंट, मस्तिष्क रेखा और रोम छिद्र से जुड़े एक्सपर्ट मौजूद रहे।
एस्ट्रो आचार्य पवन शर्मा ने बताया कि दिव्य दरबार में जन्म कुंडली, प्रश्न कुंडली, हस्तरेखा और नक्षत्र गणना के आधार पर अलग-अलग राशि और नक्षत्र के लोगों की चिकित्सा को लेकर पौराणिक पद्धति पर चर्चा की गई। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष चिकित्सा मंत्र आराधनम् के तहत दिव्य दरबार का शुभारंभ किया गया। उन्होंने बताया कि यह दरबार आगे देश के अलग-अलग राज्यों में भी लगाया जाएगा, जहां विभिन्न फील्ड के एक्सपर्ट शामिल होंगे।
एस्ट्रो आचार्य पवन शर्मा ने बताया कि यह मंच वेद, वेदांत, आयुर्वेद और ज्योतिष परंपरा को एक साथ लाने का प्रयास है। उद्देश्य यह है कि कोई भी व्यक्ति ऐसी भूमि में न रहे, जहां कोई दोष उसके लिए बाधा बने। दरबार के जरिए भूमि शुद्धिकरण, शांति और आरोग्य पर फोकस किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ड्रग्स और नशे में फंसे बच्चों के लिए मंत्र थेरेपी और अवेयरनेस पर भी काम किया जाएगा, ताकि संभावित बीमारियों को लेकर समय रहते जागरूक किया जा सके। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि राज्य के अलग-अलग इलाकों में इस तरह के दरबार लगाए जाएंगे, जहां हस्तरेखा, मस्तिष्क रेखा, फिंगरप्रिंट, वास्तु और प्रश्न कुंडली के माध्यम से लोगों की समस्याओं पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर महाराज ने बताया कि ज्योतिषी और वैद्य निरंतर लाभ में रहते हैं। कोई धन दे या न दे, समाधान दिया ही जाता है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष और चिकित्सा शास्त्र कभी निष्फल नहीं होते। अंकों की गणना से ज्योतिष में कई बातें बताई जाती हैं, जो हमारी आदि ऋषियों की परंपरा रही है। मेडिकल साइंस में कुछ बातों पर कानूनी रोक है, लेकिन मंत्र माध्यम से नियंत्रण कैसे किया जाए, यह भी समझने की आवश्यकता है।




















