हवन सामग्री युक्त गोकाष्ठ से होगा होलिका दहन, छोटीकाशी में इस बार मनाई जाएगी वैदिक होली

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The Holika bonfire will be lit using cow dung cakes containing sacrificial materials.
The Holika bonfire will be lit using cow dung cakes containing sacrificial materials.

जयपुर। छोटीकाशी में इस बार वैदिक होली मनाई जाएगी। जन-जन को होलिका दहन को नवसस्येष्टि यज्ञ के रूप मनाने की मुहिम अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद ने शुरू की है। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लकड़ी के बजाय देसी नस्ल की गाय के गोबर से बनाए गोकाष्ठ से प्रज्वलित वैदिक होली में मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां प्रदान की जाएंगी। होलिका दहन के लिए निशुल्क सुगंधित सामग्री वितरण करने की भी योजना है।

अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के तत्वावधान में जयपुर की विभिन्न गोशालाओं में विशेष रूप से निर्मित हो रहे गोकाष्ठ के माध्यम से होलिका दहन किया जाएगा। अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि परंपरागत होलिका दहन में बड़ी मात्रा में लकड़ी के उपयोग से वनों को नुकसान पहुंचता है। इसके विकल्प के रूप में गाय के गोबर से निर्मित गोकाष्ठ एक पूर्णत: पर्यावरण अनुकूल समाधान है।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि गोकाष्ठ में देसी नस्ल की गाय का शुद्ध घी, हवन सामग्री, सुगंधित औषधियां, कपूर एवं अन्य प्राकृतिक सामग्री मिलाई जा रही हैं। इससे होलिका दहन के दौरान वातावरण शुद्ध होगा, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा तथा हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं का नाश होगा।

उन्होंने कहा कि परिषद होलिका दहन को केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सामूहिक हवन के रूप में स्थापित करना चाहती है। वैदिक परंपरा में होली को एक सामूहिक यज्ञ माना गया है, जिसमें लोग अपनी नवीन फसल का अंश अग्नि देव को अर्पित कर कृतज्ञता प्रकट करते हैं। इसी भावना के साथ मंत्रोच्चार द्वारा सामूहिक आहुतियां दी जाएंगी और नवसस्येष्टि यज्ञ का आयोजन होगा।

परिषद गोकाष्ठ को लागत मूल्य पर उपलब्ध कराएगी ताकि अधिक से अधिक लोग लकड़ी के स्थान पर इसे अपनाएं। इसके लिए अग्रिम बुकिंग प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही गोविंद देवजी मंदिर सहित अन्य प्रमुख स्थलों पर आमजन के लिए निशुल्क हवन सामग्री, लौंग, इलायची, कपूर एवं गुग्गल धूप का वितरण भी किया जाएगा, जिससे लोग वैदिक विधि से होलिका दहन में सहभागिता कर सकें।

श्री पिंजरापोल गोशाला में इस अभियान के अंतर्गत महिलाएं गोबर से गोकाष्ठ एवं गोबर के बडक़ुल्ले तैयार कर रही हैं, जिससे उन्हें रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है। यह पहल गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

परिषद का मानना है कि यदि धार्मिक आयोजनों को पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक सोच और वैदिक परंपराओं से जोड़ा जाए, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। यह आयोजन गौ-आधारित अर्थव्यवस्था, महिला रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देगा।

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