नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हिन्द-प्रशांत क्षेत्र भारत और जर्मनी दोनों के लिए उच्च प्राथमिकता का क्षेत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक चुनौतियों के दौर में दोनों देश आपसी सहयोग को और गहरा करते हुए आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को मजबूत बनाने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात जर्मनी के नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और मुक्त, खुले एवं समावेशी हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में विश्वास रखते हैं। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बाद दुनिया ने यह महसूस किया है कि भरोसेमंद और लचीली आपूर्ति श्रृंखला कितनी आवश्यक है। भारत और जर्मनी तकनीक, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और सुदृढ़ बना सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता बाजार और जर्मनी की उन्नत तकनीक दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है। जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे कार्यक्रमों से वैश्विक साझेदारों को भी लाभ मिलेगा।
जर्मनी की ओर से भी भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और कौशल विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
इस तरह भारत–जर्मनी संबंधों में हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग एक नई मजबूती के रूप में उभरता नजर आ रहा है।




















