जयपुर बर्ड फेस्टिवल में रेप्टर्स, आउल व वेटलैंड्स संरक्षण पर राज्य स्तरीय मंथन

0
52

जयपुर। जयपुर बर्ड फेस्टिवल–2026 के तहत ग्रीन पीपल सोसायटी (जयपुर चैप्टर) द्वारा राजस्थान वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से शनिवार को कानोता कैंप रिजॉर्ट, जामडोली में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में देश के प्रमुख पक्षी विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने रेप्टर्स, उल्लुओं (आउल) और आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण पर गंभीर विमर्श किया।

वेटलैंड्स पैनल डिस्कशन में बीएनएचएस के पूर्व निदेशक डॉ. असद रहमानी ने अमृत सरोवर योजना में विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि देशभर में वेटलैंड्स संकट में हैं। राजस्थान वाइल्ड लाइफ बोर्ड सदस्य राजपाल सिंह ने अतिक्रमण, जल कमी और अनियंत्रित पर्यटन को प्रमुख खतरा बताते हुए सांभर लेक सहित वेटलैंड्स के लिए स्पष्ट एसओपी की आवश्यकता जताई तथा मेनार, किशन करेरी और बड़वई में सामुदायिक संरक्षण प्रयासों की सराहना की।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सीईओ रवि सिंह ने बर्ड फेस्टिवल को समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रभावी माध्यम बताया। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरुण प्रसाद ने सांभर लेक में बहु-विभागीय समन्वय, बर्ड फ्लू के दौरान किए गए संरक्षण प्रयासों और पर्यटन प्रबंधन की जरूरत पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला में रेप्टर्स एक्सपर्ट रातुल शाह की पुस्तक “भारत के बाज़” का विमोचन हुआ। उन्होंने बताया कि भारत में रेप्टर्स की 108 प्रजातियां, जिनमें 60 से अधिक राजस्थान में पाई जाती हैं। आउल एक्सपर्ट डॉ. प्राची मेहता ने जानकारी दी कि विश्व में आउल की 240 और भारत में 36 प्रजातियां हैं। पद्मश्री फोटोग्राफर अनूप शाह ने संरक्षण में फोटोग्राफी की भूमिका पर व्यावहारिक सुझाव दिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here