जयपुर। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के पंचकर्म विभाग द्वारा कर्मचारियों के लिए दो दिवसीय “व्यक्तित्व विकास” कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य कर्मचारियों में आत्मविश्वास, प्रभावी संवाद कौशल और कार्यस्थल पर सकारात्मक व्यवहार को विकसित करना रहा।
कार्यक्रम के प्रथम दिन प्रशिक्षक रविकांत सैनी ने कर्मचारियों को आत्मविश्वास बढ़ाने और कार्यस्थल पर शिष्टाचार के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सकारात्मक व्यक्तित्व न केवल व्यक्ति के विकास में सहायक होता है, बल्कि संस्थान की कार्यक्षमता और रोगी सेवा की गुणवत्ता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।
कार्यशाला के दूसरे दिन डॉ. दीपिका चौधरी ने कर्मचारियों को व्यक्तित्व विकास के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और प्रभावी संवाद कौशल की बारीकियों को सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
संस्थान के कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं कर्मचारियों के व्यक्तित्व को निखारने के साथ संस्थान में सकारात्मक कार्य संस्कृति को भी मजबूत बनाती हैं। इससे रोगी सेवा की गुणवत्ता में भी निश्चित रूप से सुधार होता है।
विभागाध्यक्ष प्रो. गोपेश मंगल ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्मचारियों के आत्मविश्वास और मनोबल को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे वे अधिक ऊर्जा और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित होते हैं।




















