जयपुर। अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से राजभवन में शिष्टाचार भेंट कर राजस्थान में गौ आधारित प्राकृतिक कृषि एवं जैविक खेती के सुदृढ़ीकरण को लेकर विस्तृत चर्चा की। परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता ने प्रदेश में कृषि, पर्यावरण एवं गौ संवर्धन से जुड़े दीर्घकालिक और व्यावहारिक उपायों पर विचार-विमर्श किया।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि राजस्थान सरकार राज्य के प्रत्येक जिले एवं तहसील स्तर पर गौ आधारित प्राकृतिक कृषि केंद्र की स्थापना की जाए। इन केंद्रों के माध्यम से गौ आधारित खेती से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रयोग एवं नवाचार को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे किसान, कृषि वैज्ञानिक, विद्यार्थी, शोधकर्ता एवं गौशालाएँ प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो सकें।
डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि हमने राज्यपाल से प्रदेश में दस हजार नई गौशालाएं खोलने की मांग की। सभी गौशालाओं को राज्य सरकार की ओर से शत प्रतिशत अनुदान दिया जाए। अगर ऐसा कर दिया जाता है तो राजस्थान गौ संवद्धन के लिए एक मॉडल स्टेट बन जाएगा।
गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से मिट्टी की उर्वरता, मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है। ऐसे में गौ आधारित प्राकृतिक कृषि एक स्थायी एवं समाधानकारी विकल्प के रूप में सामने आई है। गोबर, गोमूत्र, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजा मृत एवं पंचगव्य जैसे प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से न केवल लागत घटती है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
प्रतिनिधि मंडल ने अवगत कराया कि गौ आधारित प्राकृतिक खेती से किसानों की आय में वृद्धि, मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं गौशालाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सकती है। यदि प्रत्येक जिले एवं तहसील में प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्र स्थापित किए जाएं, तो यह मॉडल पूरे देश के लिए अनुकरणीय बन सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे इस विषय में राज्य सरकार को एक विशेष अनुशंषा प्रस्ताव प्रेषित करें, ताकि नीति स्तर पर इस दिशा में ठोस निर्णय लिया जा सके। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने प्रतिनिधिमंडल के सुझावों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने गौ आधारित प्राकृतिक कृषि की अवधारणा को समयानुकूल एवं जनहितकारी बताते हुए कहा कि यह न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
वहीं गौड़ ब्राह्मण महासभा राजस्थान के युवा प्रदेश अध्यक्ष पंकज पचलंगिया एडवोकेट ने बताया कि यूजीसी नियम 2026 के आंदोलन को जब तक जारी रखा जाएगा। तब तक सरकार इस नियम को वापस नहीं ले लेती। एक फरवरी को समाज के लोग भारी संख्या में शहीद स्मारक पर इकट्ठे होंगे। उससे पूर्व राजस्थान के सभी जिला व तहसील में यूजीसी हटाओ जन जागरण अभियान की शुरुआत की जा चुकी है।
यह नियम सभी समाजों को बांटने के लिए यह कानून लाया गया है जो अंग्रेजों का कानून याद दिलाता है । सामान्य ओबीसी व एससी एसटी के छात्रों के बीच में असमानता करने वाला कानून समानता कैसे पैदा कर सकता है। इस समझ के पार हैं । गौड़ ब्राह्मण महासभा राजस्थान के युवा प्रदेश अध्यक्ष पंकज पचलंगिया एडवोकेट ने खुले तौर पर नियमों को वापस नहीं लेने तक आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी।




















