दुर्लभ राज पंचक संयोग के साथ भक्तिभाव से 13 अप्रैल को मनाई जाएगी वरुथिनी एकादशी

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A five-kund Gayatri Mahayagna will be held today at the Govind Devji Temple.
A five-kund Gayatri Mahayagna will be held today at the Govind Devji Temple.

जयपुर। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व के साथ मनाई जाएगी। इस दिन दुर्लभ राज पंचक का संयोग बन रहा है, जो इसे आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ भौतिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत फलदायी बना रहा है। सामान्यत: पंचक को वर्जित माना जाता है, किंतु सोमवार से आरंभ होने वाला राज पंचक शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार इस विशेष योग में किए गए कार्यों में सफलता की संभावनाएं प्रबल रहती हैं। वरुथिनी एकादशी तिथि 13 अप्रैल को रात्रि 1:17 बजे प्रारंभ होकर 14 अप्रैल को रात्रि 1:08 बजे समाप्त होगी। ऐसे में व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा, जबकि पारण 14 अप्रैल को द्वादशी तिथि पर किया जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है। श्रद्धालुओं को इस दिन पीले वस्त्र अर्पित कर, चंदन या हल्दी का तिलक लगाकर विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजन में पीले पुष्प, केला, चने की दाल, गुड़, पंजीरी तथा तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना गया है। बिना तुलसी के पूजन अधूरा माना जाता है। अंत में विष्णु चालीसा और आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है।

ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि यह दिन लंबे समय से लंबित सरकारी कार्य को गति देने, भूमि-भवन अथवा अन्य अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय, नए व्यापारिक अनुबंधों तथा बड़े निवेश के लिए विशेष रूप से अनुकूल है।

ज्योतिषाचार्य पं. सुरेन्द्र गौड़ ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों में एकादशी को केवल व्रत का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बताया गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

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