सिंधी समाज की महिलाओं ने जेठ चंड की पूजा कर प्रकृति बचाने का दिया संदेश

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जयपुर। सिंधी समाज की महिलाओं ने गुरुवार को प्रातः काल शहर के झूलेलाल मंदिरों ,सार्वजनिक जलाशयों और अपने घरों में जेठ चंड की पूजा की ,वृक्ष की टहनी को आटे से बने मोदक में लगा कर वरुण देवता का आह्वान कर पूजा की ।

समाज के तुलसी संगतानी ने बताया कि जेठ चंड की पूजा सिंधी ज्येष्ठ मास के समापन पर की जाती है,इस अवसर पर कलश पूजन हुआ। कहा जाता है कि परिवार में पुत्र रत्न की प्राप्ति हेतु मन्नत मांगी जाती थी कि जेठ चंड पर उस बालक के नाम से एक फल या मिष्ठान भगवान के नाम अर्पित करेंगे , नई पीढ़ी के लोगों ने भी पुत्री की प्राप्ति पर भी प्रसन्न हो कर पूजा करते की। इस त्यौहार में परिवार की खुशहाली के लिए पूजा की जाती है।

इस अवसर पर वरुण अवतार भगवान झूलेलाल को ऋतु फलों आम,जामुन,खरबूजे,आलूबुखारे साथ ही घरों में बने पुलाव,मीठी सेवइयां और छोले का भोग लगाया गया। महिलाओं ने अपने बच्चों को संदेश दिया कि प्रकृति को बचाएं और पेड़ों की रक्षा करें। महिलाओं ने हाथ में अक्षत और चीनी लेकर अखो प्रार्थना की कि आने वाले समय में बारिश अच्छी हो और देश में खूब धान्य उत्पन्न हों,देश के सभी जलाशय भरे रहें। सभी तरफ हरियाली हो । यह त्यौहार हमें प्रकृति को बचाने ,वृक्षों की सेवा करने और मौसमी फलों का खूब सेवन कर शरीर को हृष्ट पुष्ट करने का संदेश देता है।

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