June 19, 2024, 3:20 am
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सितंबर स्पंदन: जेकेके में बुना गया गुलाबी हसरतों का ताना-बाना

जयपुर। ‘आरज़ूएँ, ख्वाहिशें, अरमान और चाहत रहे, दिल तभी तक दिल है जब तक इसमें इक हसरत रहे’, कुछ ऐसे ही जज्बातों के साथ जवाहर कला केन्द्र में रविवार, 17 सितंबर को फिल्मी जगत में जयपुर का नाम रोशन करने वाले मशहूर शायर और गीतकार हसरत जयपुरी को याद किया गया। मौका था साहित्य, संगीत और सिनेमा को समर्पित सितंबर स्पंदन में कला संसार मधुरम के तहत हसरत जयपुरी की स्मृति में आयोजित संवाद प्रवाह और संगीत संध्या का।

संवाद प्रवाह में साहित्यकार और कला मर्मज्ञ इकराम राजस्थानी (अध्यक्ष पं. जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी), फिल्म लेखक-गीतकार दुष्यंत और सिने विश्लेषक नवल व्यास ने जयपुरी के फिल्मी सफर और गीतों की खूबसूरती पर चर्चा की, वहीं रहमान हरफनमौला ने अपनी सुरीली आवाज़ में उनके गीत महफिल में पेश किए। इस दौरान केन्द्र की अति. महानिदेशक प्रियंका जोधावत, आईएएस नवीन जैन, आईएएस समित शर्मा अन्य गणमान्य लोग व कला प्रेमी मौजूद रहे। प्रियंका जोधावत ने कहा कि सितंबर स्पंदन सफल मुहिम बनकर उभरा है, कला संसार मधुरम के तहत केन्द्र इस तरह के आयोजन करता रहेगा।

‘हसरत की हसरतों का ठिकाना है बस जयपुर’

इकराम राजस्थानी ने कहा कि हसरत जयपुर की शान है, उनके नाम से शहर को पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि गीतकार ही है जो कागज पर दिल के भाव उतारने का हुनर रखता है, हसरत जयपुरी के गीतों से तो लोग आज तक अपने भाव जोड़ते है अपने दिल के जज्बात ढूंढ रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मों के लिए गीत लिखना आसान नहीं है, हसरत जयपुरी की खासियत ये रही कि वे हर गीत के लिए नए शब्द इजात करते थे, उनके गीत अमर है, आज तक लोग उनकी कसमे खाते हैं।

जयपुर में हसरत की हवेली को लेकर उन्होंने कहा कि ‘उल्फत की, मोहब्बत की, चाहत की हवेली है, हसरत से देखो इसे ये हसरत की हवेली है।’ हसरत जयपुरी के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए जयपुर के प्रति हसरत के कहे शब्दों को उन्होंने दोहराया,’जाऊँ कहीं भी मुझे आना है बस जयपुर, हसरत की हसरतों का ठिकाना है बस जयपुर।’

‘लोकगीत है हसरत जयपुरी के गीत’

वहीं दुष्यंत ने कहा कि फिल्मों में लिखने के लिए हसरत जयपुरी के गीतों ने प्रेरित किया, मुंबई में रहकर ये कहते हुए बड़ा गर्व होता है कि हसरत जयपुरी मेरे शहर के हैं। उन्होंने कहा कि गीतकार भले ही पर्दे के पीछे रहता हो पर उसके गीत दिल से सीधे टकराते हैं इसलिए लोग हमेशा उसे दिल में जगह देते हैं। उन्होंने कहा कि हसरत जयपुरी के गीत लोकगीतों की तरह है।

‘हसरत के तीन गीतों पर मो. रफी को फिल्म फेयर’

नवल व्यास ने कहा कि यह जयपुर के लिए बोनस है कि हसरत जैसे कलाकार ने यहां जन्म लिया। हसरत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि प्रेम में सफलता न मिलने पर हसरत ने मुंबई की ओर कदम बढ़ाए। वहां कंडक्टरी की, जयपुर की मिट्टी के खिलौने बेचे, मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर की नज़र उन पर पड़ी। पृथ्वीराज कपूर के कहने पर राजकपूर ने उनसे अपनी फिल्म ‘बरसात’ में ‘जिया बेकरार’ है गीत लिखवाया, इसके बाद हसरत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने गीतों की बदौलत रोमांस के बादशाह कहलाए। उन्होंने बताया कि हसरत को दो फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाज़ा गया, मो. रफी को जिन 6 गीतों के लिए फिल्म फेयर मिला उनमें से तीन हसरत जयपुरी के थे।

सुरीले तरानों से सजी शाम

संवाद प्रवाह के बाद रहमान हरफनमौला ने अपनी सुरीली आवाज़ में हसरत जयपुरी के गीतों से महफिल को सजाया। उन्होंने ‘तुमने किसी की जान को जाते हुए देखा है’ गीत से शुरुआत की और श्रोताओं को अपने सुरीले सफर का साथी बना लिया। रहमान ने ‘जी ऐसा मौका कहां मिलेगा’, ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’, ‘जिंदगी इक सफर है सुहाना’, ‘जाने कहा गए वो दिन’ सरीखे गीत पेश किए। उनके साथ अब्दुल रशीद, शेर मोहम्मद, नरेन्द्र सिंह और नरेन्द्र बालोदिया क्रमश: सैक्सोफोन, अकॉर्डियन, तबला और ऑक्टोपैड पर संगत की। आईएएस समित शर्मा ने भी हसरत जयपुरी के कुछ गीत पेश किए।

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