तीन शुभ योगों में मनाई गई पौष पूर्णिमा

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Govind Devji temple illuminated with lights
Govind Devji temple illuminated with lights

जयपुर। पौष पूर्णिमा ब्रह्म योग,इंद्र योग और शिव वास योग में शनिवार को मनाई गई। पौष पूर्णिमा के साथ प्रयागराज में माघ मेला शुरू हो गया। छोटीकाशी में पौष पूर्णिमा को ठाकुरजी को धवल पोशाक धारण कराकर सफेद पुष्पों से श्रृंगार किया गया। दूध से बनी खीर का भोग लगाया गया। वहीं, मंदिरों के बाहर और गोशालाओं में श्रद्धालुओं ने जमकर दान-पुण्य किया।

पौष पूर्णिमा का मुख्य आयोजन आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में हुआ। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक कर सफेद गर्म जामा पोशाक धारण कराई गई। मोगरे की सफेद कलियों और चंदन से श्रृंगार किया गया। मंगला से शयन झांकी तक मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा।

सुभाष चौक पानों का दरीबा स्थित श्री शुक सपं्रदाय की प्रधान पीठ श्री सरस निकुंज में शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। ठाकुर राधा सरस बिहारी सरकार का वेदोक्त मंत्रोच्चार से अभिषेक कर पुष्पों से श्रृंगार किया गया। खीर सहित अन्य धवल भोग सामग्री का भोग लगाया गया।

चौड़ा रास्ता के राधा दामोदरजी मंदिर में महंत मलय गोस्वामी के सान्निध्य में ठाकुर जी की विशेष धवल झांकी सजाई गई। मदन गोपाल जी, त्रिपोलिया बाजार के विनोदी लाल जी, पुरानी बस्ती के गोपीनाथ जी, रामगंज बाजार के लाड़लीजी, चादंनी चौक के बृज निधि जी सहित अन्य वैष्णव मंदिरों में पौष पूर्णिमा पर विशेष झांकी के दर्शन कराए गए।

जनता कॉलोनी में किए सवा लाख जप

सबके उज्जवल भविष्य की कामना के साथ शनिवार को जनता कॉलोनी स्थित गायत्री चेतना केन्द्र पर शनिवार को सवा लाख गायत्री महामंत्र जप अनुष्ठान हुआ। साधकों ने अखंड दीपक के समक्ष बैठकर 5, 11, 21, 31 माला का जप किया। जप के दौरान सभी के मंगलमय जीवन की भावना की। कुछ लोगों ने अपने घर पर ही जप किया। जप के बाद गायत्री महायज्ञ किया गया। गायत्री महामंत्र के साथ आहुतियां प्रदान की गई। श्री श्याम मंदिरों में शनिवार को अखंड ज्योति प्रज्जवलित कर कीर्तन का आयोजन किया गया।

पूर्णिमा यज्ञ में विदेशी श्रद्धालु ने अर्पित की आहुतियां

अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से शनिवार को पौष पूर्णिमा पर एक साथ एक ही समय 115 स्थानों पर गायत्री हवन किया गया। कड़ाके की सर्दी के बावजूद यज्ञ में देश-विदेश से लगभग 600 परिजनों ने श्रद्धापूर्वक आहुतियां अर्पित कीं। शिकागो, इंडियाना, न्यू जर्सी, यूएई, टेक्सास और सिडनी से अनेक परिजन ऑनलाइन यज्ञ से जुड़े। राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, चूरू, हनुमानगढ़, टोंक, नीमकाथाना, दौसा, सीकर, अलवर, दूदू, श्रीगंगानगर सहित पुणे, मुंबई, बैंगलोर, साहिबगंज (झारखंड) आदि स्थानों से भी परिजनों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

इसके साथ ही ब्रह्मपुरी शक्तिपीठ, वेदना निवारण केन्द्र, नीमकाथाना शक्तिपीठ, कोटा शक्तिपीठ पर भी ऑनलाइन यज्ञ संपन्न हुआ। कुछ परिजन ऑनलाइन माध्यम से नहीं जुड़ सके तो उन्होंने अपने-अपने स्थानों पर ऑफलाइन यज्ञ कर आहुतियां अर्पित कीं।
उल्लेखनीय है कि इस आध्यात्मिक अभियान के माध्यम से प्रत्येक पूर्णिमा पर देश-विदेश से नए परिजन निरंतर जुड़ रहे हैं, जिससे यह यज्ञ एक वैश्विक आध्यात्मिक अभियान का स्वरूप लेता जा रहा है।

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