सिंधी कवि सम्मेलन ‘लफ़्ज़नि जो मेलो’ का आयोजन

0
420

जयपुर। सिंधी सेंट्रल एसोसिएशन एवं राजस्थान सिंधी अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय सिंधी कवि सम्मेलन ‘लफ़्ज़नि जो मेलो’ का आयोजन रविवार को जवाहर नगर सेक्टर-5 स्थित श्री झूलेलाल मंदिर परिसर में किया गया। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए ख्यातिप्राप्त सिंधी कवियों ने अपनी श्रेष्ठ रचनाओं का पाठ कर साहित्य प्रेमियों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री अमरापुर के संत मोनू राम साहिब एवं मुकेश साध द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। एसोसिएशन अध्यक्ष रतन ऐलानी एवं अकादमी सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने बताया कि कवियों ने सामाजिक सरोकार,सिंधी संस्कृति, देशभक्ति, शृंगार, हास्य-व्यंग्य और भक्ति रस की कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को साहित्य से जोड़ा।

सम्मेलन के संयोजक तुलसी संगतानी ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को सिंधी भाषा एवं साहित्य से जोड़ना तथा समाज में साहित्यिक चेतना को प्रोत्साहित करना रहा। प्रसिद्ध साहित्यकार भगवान अटलानी ने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा सिंधी पर गर्व करना चाहिए। बाहर की भाषाएं हम धन खर्च कर सीखते हैं, जबकि मातृभाषा सीखने में कुछ भी खर्च नहीं होता। सिंधी भाषा सीखकर सिविल सेवाओं और शिक्षण जैसे क्षेत्रों में भी अवसर प्राप्त किए जा सकते हैं।

जयपुर के वरिष्ठ कवि खेमचंद गोकलानी ने अपने बिछड़े सिंध को याद करते हुए भावपूर्ण कविताएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा कि “अपनों को अपने अच्छे नहीं लगते, अपनों को गैर अच्छे लगते हैं।” वहीं हरीश कर्मचंदानी ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता में कहा—“हर नौजवान का होता है सपना, मज़बूत हिंदुस्तान का होता है सपना।

डॉ. माला कैलाश ने मानवीय संवेदनाओं को छूती कविता “खामोशियां सुनती हैं, तो लगता है कि कोई तो है जो बोल रहा है…” प्रस्तुत की। डॉ. रूपा मंगलानी ने देशभक्ति का संदेश देती रचना “उथो हिन्द जा अगवानु उथो, भारत जो जय जय गान लिखो” सुनाकर श्रोताओं में उत्साह भर दिया।

पूजा चंदवानी ने मां की लोरी की महत्ता पर कविता प्रस्तुत की, जबकि लक्ष्मण पुरुषवाणी ने “गुज़रे हुए लम्हों का हिसाब रखूं या यादों को बेहिसाब रखूं” पंक्तियों से श्रोताओं को भावुक किया। चित्रेश रिझवानी ने पिता-पुत्र संबंधों पर और तुलसी संगतानी ने “एक छोटी सी मुलाक़ात” कविता प्रस्तुत की।

इसके अलावा वंदिता आहूजा,कविता तनवानी, अजमेर से कमला बूटानी, गीता गोकलानी, जयकिशन गुरबाणी, टोंक से ऋचा इसरानी तथा जोधपुर से ऋतिका मनवानी ने भी अपनी काव्य रचनाओं से सम्मेलन को गरिमामय बनाया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here