हाईकोर्ट में शनिवार की छुट्टी पर रार: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के साथ हुई मैराथन बैठक

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जोधपुर/जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा महीने के दो शनिवारों को कार्य दिवस घोषित करने के निर्णय पर अधिवक्ताओं का विरोध तेज हो गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर गतिरोध दूर करने के लिए मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.पी. शर्मा ने जोधपुर और जयपुर के प्रमुख अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया।

इस बैठक में राजस्थान बार काउंसिल अध्यक्ष भुवनेश शर्मा,राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन जोधपुर अध्यक्ष दिलीप सिंह उदावत, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन जोधपुर अध्यक्ष रंजीत जोशी, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर: अध्यक्ष राजीव सोगरवाल, महासचिव दीपेश शर्मा एवं उपाध्यक्ष अनुराग कलावटिया शामिल हुए।

इन अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट द्वारा 12 दिसंबर 2025 को लिए गए उस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई। जिसमें दो शनिवारों को वर्किंग डे घोषित किया गया था। प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि इतना महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले बार और अधिवक्ताओं से कोई परामर्श नहीं किया गया। उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 23-ए के तहत कार्य दिवसों में वृद्धि का अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है। यह निर्णय हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ द्वारा कानूनी रूप से नहीं लिया जा सकता।

अधिवक्ताओं के प्रबल विरोध और कानूनी दलीलों को सुनने के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने एक न्यायाधीशों की विशेष समिति गठित करने के आदेश दिए हैं। यह समिति बार प्रतिनिधियों,वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बार काउंसिल के सदस्यों से चर्चा कर उनकी शिकायतों पर विचार करेगी।

समिति अपनी रिपोर्ट 21 जनवरी 2026 को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को सौंपेगी। इस रिपोर्ट को पूर्ण पीठ की बैठक में रखा जाएगा, जिसके आधार पर अंतिम फैसला होगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने बार प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया है कि निर्णय बार के सर्वोत्तम हित में ही लिया जाएगा। तब तक सभी एसोसिएशनों ने अपनी अगली रणनीति को स्थगित रखा है।

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