जयपुर। छोटे दादा गुरुदेव शुक सम्प्रदाय पीठाधीश रसिक माधुरी शरण महाराज की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य में अजमेर रोड क्वींस कॉलोनी नीलकंठ कॉलोनी स्थित श्री सरस निकुंज की पीठ बरसाना में हो रही श्रीराम कथा में बुधवार को श्री शुक सम्प्रदाय पीठाधीश अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में व्यास पीठ पर आचार्य डॉ. राजेश्वर ने वन गमन, निषादराज-केवट मिलन, वाल्मीकि-भारद्वाज ऋाषि से भेंट सहित अन्य प्रसंगों का श्रवण कराया।
प्रसंगानुसार भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ वन गमन के लिए प्रस्थान करते हैं। मार्ग में नदी आने पर वे केवट से उस पार लगाने का आग्रह करते हैं। तब केवट के भाव मेरी छोटी सी है नाव तेरे जादूगर पांव कैसे बैठाऊं नाव में…भजन में मुखरित हो उठते हैं। भगवान इससे पहले निषादराज से मिलते है और पूरा मान-सम्मान देते हैं। इसके बाद भगवान राम महर्षि वाल्मीकि और भारद्वाज ऋषि से भेंट करते हैं। भेंट के दौरान वे वन में रहने का उपयुक्त स्थान के बारे में पूछते हैं तो दोनों कहते हैं आप सर्वव्यापी है।
यह पूरा ब्रह्मांड आपका है। आप कहीं भी रह सकते हैं। भक्त के ह्दय में निवास कर सकते हैं। दोनों ही उन्हें चित्रकूट में निवास करने का सुझाव देते हैं। बुधवार को गलता गेट स्थित कनक बिहारी मंदिर के महंत सियारामदास महाराज, महंत अयोध्यादास महाराज, किशनपोल बाजार के अटल बिहारी मंदिर के महंत नरेन्द्र महाराज सहित अनेक संत-महंतों ने सानिध्य प्रदान किया।
श्री सरस परिकर की ओर से सभी का सम्मान किया गया। एक ओर कथा में जहां भगवान राम ने ऋषि-मुनियों से भेंट की वहीं दूसरी ओर कथा में साक्षात अनेक संतों ने पधार कर भक्तों को दर्शन और सान्निध्य प्रदान किया। श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि कथा प्रवचन नौ जनवरी तक प्रतिदिन मध्याह्न 1:30 से शाम 5 बजे तक होंगे।




















