जयपुर/उदयपुर। राजस्थान के पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ ने उदयपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण कराने वाले एक सक्रिय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर टीम ने त्वरित डिकॉय ऑपरेशन चलाया। जिसमें महिला दलाल पूजा सागर और डॉक्टर नीना सक्सेना को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। टीम ने डिकॉय के लिए दी गई तीस हजार रुपये की राशि भी मौके से जब्त कर ली। दोनों आरोपियों के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने बताया कि उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में दलालों व डॉक्टरों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने की जानकारी मिल रही थी। इसी के आधार पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. हेमन्त जाखड़ के मार्गदर्शन में पुलिस इंस्पेक्टर मंजू मीणा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने उदयपुर पहुंचकर जाल बिछाया। महिला दलाल पूजा सागर ने डिकॉय गर्भवती महिला को महाराणा भूपाल अस्पताल के पास 35 हजार रुपये लेकर बुलाया। इसके बाद वह महिला को इधर-उधर घुमाती रही और फिर अमर आशीष अस्पताल व टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर ले गई। वहां उसने संचालक डॉ. नीना सक्सेना से मुलाकात कराई।
इसके बाद पूजा सागर डिकॉय महिला को धरा डायग्नोस्टिक सेंटर लेकर गई, जहां 2 हजार 500 रुपये की रसीद कटवाई गई और सोनोग्राफी कराई गई। सोनोग्राफी की रिपोर्ट, रसीद, फिल्म और डॉक्टर की रेफरल स्लिप लेकर दोनों वापस अमर आशीष अस्पताल पहुंचीं। वहां डॉ. नीना सक्सेना ने 30 हजार रुपये लेकर भ्रूण का लिंग बताया। जैसे ही पूर्व निर्धारित संकेत मिला, टीम ने तुरंत छापा मारकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
परियोजना निदेशक डॉ. राकेश मीणा ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार की गई है। मामले में अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयों से अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण पर रोक लगेगी, बेटियों की रक्षा होगी और समाज में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।



















