भगवान से ही जीव का शाश्वत संबंध, जगत मात्र व्यवहार : आचार्य मृदुल कृष्ण

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The soul's eternal connection is with God alone.
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जयपुर। श्री गिर्राज संघ परिवार, विश्वकर्मा जयपुर के 27वें वार्षिकोत्सव पर विद्याधर नगर सेक्टर-7 स्थित अग्रसेन हॉस्पिटल के पीछे चल रहे 108 श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन रविवार को विश्व विख्यात कथा व्यास भागवत रत्न आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि भगवान से ही जीव का शाश्वत संबंध है, जबकि जगत केवल व्यवहार मात्र है।

कथा के दौरान उन्होंने तृष्णा के तीन प्रकार—लोकेषणा, पुत्रेषणा और वित्तेषणा—पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यही मनुष्य को संसार में बांधती हैं। साथ ही बुद्धि के चार स्वरूपों—मति, सुमति, महामति और मंदमति—का उल्लेख करते हुए सर्वकल्याण की भावना को श्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि ईश्वर साकार और निराकार दोनों हैं तथा भक्त की भावना के अनुसार तदाकार हो जाते हैं।

महाराज ने भीष्म पितामह प्रसंग, परीक्षित जन्म कथा, परीक्षित-कलियुग संवाद, परीक्षित श्राप एवं ध्रुव चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और कथा पंडाल राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा।

कथा के आरंभ व समापन पर पूजन-आरती संयोजक विनोद गोयल व श्री गिर्राज संघ परिवार के पदाधिकारियों ने की। इस अवसर पर 125 ब्राह्मणों द्वारा श्रीमद्भागवत मूल पाठ किया गया। संघ अध्यक्ष रामरतन अग्रवाल व महामंत्री गिरीश अग्रवाल ने बताया कि सोमवार को प्रह्लाद चरित्र, वामन अवतार एवं श्रीकृष्ण जन्म कथा के साथ नंदोत्सव होगा। 13 जनवरी को बाल लीला व गिरिराज पूजन, 14 को महारास व रुक्मिणी विवाह तथा 15 जनवरी को सुदामा चरित्र व पूर्णाहुति होगी।

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