बेटी के साथ डिग्री लेने पहुँची स्मिता, बोलीं– पढ़ाई की कोई उम्र नहीं

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जयपुर। विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में शिक्षा के प्रति समर्पण और जज़्बे की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली, जब स्मिता अपनी 6 साल की बेटी के साथ डिग्री लेने मंच पर पहुँचीं। समारोह में मौजूद हर व्यक्ति के लिए यह दृश्य भावुक कर देने वाला था। स्मिता ने कहा कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती और न ही जिम्मेदारियां शिक्षा की राह में बाधा बननी चाहिए। उन्होंने बताया कि परिवार, पढ़ाई और जीवन की अन्य जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर भी आगे बढ़ा जा सकता है। उनका यह संदेश खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना, जो किसी न किसी कारण से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देती हैं। स्मिता की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि अगर इच्छा शक्ति मजबूत हो तो हर सपना साकार किया जा सकता है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्रनिर्माण का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय से निकलने वाले विद्यार्थी ज्ञान, संस्कार और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें और अपने कार्य से समाज व देश का नाम रोशन करें। अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि आज का युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति है और उनसे अपेक्षा है कि वे नवाचार, आत्मनिर्भरता और ईमानदारी के साथ देश के विकास में योगदान दें। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर में बदलना ही सच्ची सफलता है।

9वें दीक्षांत समारोह में 1983 डिग्रियों का वितरण

मौका था विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह का, जो इस वर्ष इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि इसी अवसर पर सेंटर फॉर डिस्टेंस एजुकेशन और ऑनलाइन विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय का पहला संयुक्त दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया गया। इस भव्य आयोजन में विभिन्न संकायों के स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा के 1,942 विद्यार्थियों तथा 41 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। . विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में विद्यार्थियों के चेहरे पर वर्षों की मेहनत और संघर्ष की संतुष्टि साफ झलक रही थी। अभिभावकों और शिक्षकों के लिए यह क्षण गर्व का था, जब उनके सामने विद्यार्थियों ने शिक्षा की एक महत्वपूर्ण सीढ़ी पार की।

मेधावी विद्यार्थियों को 109 पदकों से सम्मान

दीक्षांत समारोह के दौरान शैक्षणिक उत्कृष्टता को सम्मानित करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा कुल 109 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। इनमें 47 स्वर्ण पदक, 32 रजत पदक और 30 कांस्य पदक शामिल रहे। पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने निरंतर परिश्रम, अनुशासन और लगन से अपनी उपलब्धि हासिल की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि ये विद्यार्थी न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा हैं।

आर्थिक संघर्ष से सफलता तक, पलक पूनिया की प्रेरक कहानी

बीसीए की छात्रा पलक पूनिया की कहानी समारोह की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक रही। पलक ने बताया कि आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। पलक ने कहा कि विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय ने उन्हें सिर्फ डिग्री नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास, हौसला और अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच भी प्रदान किया। आज पलक एक सफल सुपरमॉडल के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं और इसका श्रेय वह अपने विश्वविद्यालय को देती हैं, जिसने हर मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया।

फाइनल ईयर में ही 50 करोड़ की कंपनी खड़ी करने वाले विशाल

दीक्षांत समारोह में फाइनल ईयर के छात्र विशाल भी चर्चा का केंद्र रहे। विशाल ने पढ़ाई के दौरान ही 50 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन वाली कंपनी की स्थापना कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। विशाल ने बताया कि विश्वविद्यालय के नवाचार और उद्यमिता वातावरण ने उन्हें अपने विचारों को व्यवसाय में बदलने का आत्मविश्वास दिया। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, संसाधन और प्रोत्साहन मिलने से विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार देने वाला भी बन सकता है।

प्रेरणा, समावेशन और आत्मनिर्भरता का संदेश

विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्रियों के वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रेरणा, समावेशन और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश लेकर आया। स्मिता जैसी छात्राएं, पलक पूनिया जैसी संघर्षशील प्रतिभाएं और विशाल जैसे नवाचारशील उद्यमी इस बात का प्रमाण हैं कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को सिर्फ शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की दिशा और आत्मविश्वास भी प्रदान करता है। यह समारोह शिक्षा की शक्ति और उसके सामाजिक प्रभाव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

कुलसचिव ने दिलाई शपथ, जिम्मेदारी और मूल्यों पर दिया जोर

दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रवीण चौधरी ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। शपथ में विद्यार्थियों ने अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने, मानवीय मूल्यों का सम्मान करने, अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र की सेवा में करने तथा अपने विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने का संकल्प लिया। कुलसचिव ने अपने संदेश में कहा कि विश्वविद्यालय से प्राप्त डिग्री के साथ विद्यार्थियों पर समाज के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों से यह अपेक्षा करता है कि वे जहां भी जाएं, अपने आचरण, कार्य और सोच से संस्थान का नाम रोशन करें।

नेतृत्व, मार्गदर्शन और मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान

कुलसचिव ने यह भी कहा कि आज का यह समारोह विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी विनम्रता, अनुशासन और सामाजिक संवेदनशीलता को न भूलें। विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए संस्कार, ज्ञान और अवसरों का सदुपयोग कर वे न केवल अपने लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।

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