भागवत कथा में 56 भोग व गिरिराज पूजन

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जयपुर। श्री गिर्राज संघ परिवार विश्वकर्मा, जयपुर के 27वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर विद्याधर नगर, सेक्टर-7 स्थित अग्रसेन हॉस्पिटल के पीछे आयोजित 108 श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज ने कहा कि दान की महिमा तभी फलदायी होती है जब वह समय पर और सत्पात्र को दिया जाए। ऐसा दान ही वृद्धि और मंगल का कारण बनता है।

उन्होंने कहा कि आयु बढ़ने के साथ जीव की आसक्ति बढ़ती है, जबकि शरीर की शक्ति घटती जाती है। इसलिए किसी भी वस्तु में आसक्ति न रखते हुए केवल भगवन्नाम और श्री बिहारी जी के प्रेम में लीन होना चाहिए, क्योंकि सच्चा आनंद केवल ईश्वर भक्ति में ही संभव है।

कथा प्रसंग में महाराज ने पूतना मोक्ष, शकटासुर और तृणावर्त वध की कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गिरिराज पर्वत धारण कर ग्वाल-बालों को इंद्र के प्रकोप से बचाने की लीला से गिरिराज महाराज की महिमा प्रकट होती है। उन्होंने कहा कि गिरिराज जी और श्री बिहारी जी में कोई भेद नहीं है।

कथा के दौरान भावपूर्ण भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। इस अवसर पर 125 ब्राह्मणों ने श्रीमद् भागवत के मूल पाठ का पाठ किया। आयोजन के संयोजक विनोद गोयल व श्री गिर्राज संघ परिवार के पदाधिकारियों ने पूजन व आरती की।

संघ परिवार के अध्यक्ष राम रतन अग्रवाल व महामंत्री गिरीश अग्रवाल ने बताया कि बुधवार को महारास कथा, मथुरा गमन व रुक्मिणी विवाह महोत्सव आयोजित होगा, जबकि 15 जनवरी को सुदामा चरित्र,नवयोगेश्वर संवाद व परीक्षित मोक्ष कथा के साथ पूर्णाहुति होगी।

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