मकर संक्रांति पर्व पर ग्यारह साल बाद बन रहा है दुर्लभ योग

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मकर संक्रांति पर्व पर आज 11 वर्ष बाद षटतिला एकादशी का महासंयोग बना है। इससे पहले यह दुर्लभ योग वर्ष 2015 में बना था। मान्यता है कि यह महासंयोग सभी बिगड़े कार्यों को बनाने वाला और अविवाहित जातकों के लिए वरदान सिद्ध होने वाला है।

ज्योतिषाचार्य राज कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाने के पानी में थोड़ी हल्दी डालनी चाहिए। भगवान विष्णु के मंदिर जाकर तिल और गुड़ का भोग लगाएं और तिल की रेवडिय़ों को प्रसाद के रूप में वितरित करें। इस दिन श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करना बेहद शुभ होगा। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का 108 बार जाप करना चाहिए।

तिल मिले जल से करें स्नान, फिर दान

षट्तिला एकादशी को तिल मिले जल से स्नान कर तिल के तेन से मालिश करनी चाहिए। दान, हवन और तिल का सेवन विशेष फलदायी माना गया है। व्रत करने से सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है। मकर संक्रांति को दान का सबसे बड़ा पर्व माना गया है। इस दिन किए गए दान का सौ गुना फल प्राप्त होता है। इसी दिन से सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और सूर्य की गति तिल-तिल बढ़ती है।

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