मकर संक्रांति का पर्व: छतों पर दिनभर चला पतंगबाजी का दौर

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जयपुर। नव अंग्रेजी वर्ष 2026 का पहला बड़ा पर्व मकर संक्रांति बुधवार को छोटीकाशी में श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक उमंग के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सराबोर नजर आया। छतों पर दिनभर पतंगबाजी का दौर चलता रहा और डीजे की धुनों के बीच वो काटा को शोर गूंजता रहा। लोगों ने सुबह का चाय-नाश्ता और दोपहर का भोजन भी परिवार और मित्रों के साथ छतों पर ही किया। चारदीवारी में पतंगबाजी का जुनून आसमान छूता नजर आया।

नीला आसमान पतंगों से अटा दिखा। लोगों के उत्साह के कारण अति व्यस्त रहने वाली चारदीवारी की सडक़े सूनी और बाजार लगभग बंद नजर आए। चारदीवारी के बाहर का भी यही हाल था। मकर संक्रांति के कारण जयपुर में एक तरह अघोषित बंद का नजारा था। बाजार में केवल मांझे, पतंग, खाने-पीने और अन्य जरुरी सामान की दुकानें ही खुली दिखी।

राजधानी में कई स्थानों पर सामूहिक रूप से भी पतंगबाजी हुई। चारदीवारी के जौहरी बाजार, किशन पोल, चांदपोल, रामगंज, त्रिपोलिया की पुरानी हवेलियों पर पतंगबाज पेच लड़ाते नजर आए। विदेशियों ने भी पतंगबाजी का लुत्फ उठाया। छोटे बच्चों ने छोटी पतंगें और गुब्बारे उड़ाए।

देर शाम शहर में जोरदार आतिशबाजी की गई। शुभकामनाओं के प्रतीक विशिंग लैंप आकाश में छोड़े गए, जिससे संपूर्ण वातावरण उत्सवमय हो उठा। आतिशबाजी के कारण दिवाली का सा नजारा हो गया।

मंदिरो,गोशालाओं ने दिनभर जारी रहा दान-पुण्य का जोर

श्रद्धालुओं ने सुबह गंगा जल मिले पानी से स्नान कर सूर्य भगवान को अघ्र्य अर्पित किया। इसके बाद मंदिरों और गोशालाओं में जाकर दान-पुण्य किया। श्रद्धालुओं ने तिल, कंबल, गुड़, खिचड़ी, चावल, नमक-वस्त्र, देशी घी तथा पशु चारे का दान किया।
टोंक रोड सांगानेर की श्री पिंजरापोल गोशाला, दुर्गापुरा, बगरू, हिंगोनिया, ढहर के बालाजी, खोले के हनुमानजी की गोशाला में दिनभर गायों को चारा, गुड़ खिलाने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि सूर्यदेव ने मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो गए और मलमास की समाप्ति हो गया है। अब विवाह, उपनयन, गृह प्रवेश सहित सभी मांगलिक कार्य पुन: प्रारंभ हो जाएंगे।

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