
जयपुर। प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा और समकालीन कला के अद्भुत संगम को साकार करती राष्ट्रीय ट्रैवलिंग एग्जिबिशन एका द वन कोच्चि, कोयंबटूर, बेंगलुरु, मुंबई, भोपाल और अहमदाबाद में अपनी सफल प्रस्तुतियों के बाद अब जयपुर आ रही है। 16 से 18 फरवरी तक जवाहर कला केंद्र की अलंकार दीर्घा में आयोजित प्रदर्शनी में केरल की वरिष्ठ चित्रकार डॉ. बीना एस उन्नीकृष्णन द्वारा तैयार कलाकृतियां देखने को मिलेंगी। कला प्रेमियों को पेंटिंग्स में साकार 64 योगिनियों के दिव्य स्वरूप से आध्यात्मिक चेतना और समकालीन अभिव्यक्ति के अनोखे संगम का साक्षात्कार करने का अवसर मिलेगा। प्रदर्शनी रोजाना 11 बजे से शाम 7 बजे तक कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी। इस अवसर पर प्रदर्शनी के साथ ही कलाकार द्वारा तैयार डॉक्यूमेंट्री वाई 64 व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
तीन दिवसीय प्रदर्शनी में चित्रकार डॉ. बीना द्वारा पिछले 5 वर्षों की मेहनत और निष्ठा से तैयार किए गए 68 एकल चित्रों को प्रदर्शित किया जाएगा। डॉ. बीना ने बताया कि इन चित्रों में आदिशक्ति कि दिव्य अभिव्यक्तियों को 64 योगिनियों के स्वरूप में कैनवास पर उकेरा गया है जो फेमिनाइन एनर्जी में निहित कोमलता, रचनात्मकता और आत्म-प्रेम के गुणों को दर्शाते है।
डॉ. बीना उन्नीकृष्णन एक सामाजिक उद्यमी, कलाकार और सांस्कृतिक चिंतक हैं। तीन दशकों से अधिक के अपने बहुआयामी करियर में उन्होंने कला, उद्यमिता, फिल्म मेंकिंग, लेखन और आध्यात्मिक संवाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे ‘कंकाली ट्रस्ट फॉर आर्ट्स एंड कल्चरल इकोनॉमिक डेवलपमेंट’ की संस्थापक हैं, जो वंचित कलात्मक धाराओं को सशक्त बनाने और रचनात्मक क्षेत्र में लैंगिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है। “एका : द वन” केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक आंतरिक यात्रा है— जहां दर्शक कला के माध्यम से शक्ति, संतुलन और चेतना के गहरे अर्थों से जुड़ सकते हैं। जयपुर वासियों के लिए यह अवसर भारतीय आध्यात्मिक विरासत को समकालीन दृष्टि से देखने और अनुभव करने का एक दुर्लभ अवसर है।



















