जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी ‘राष्ट्र रत्न’ से सम्मानित, भव्य आयोजनों के साथ संपन्न हुआ चादर महोत्सव

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Jinmaniprabh Surishwarji honoured with 'Rashtra Ratna'
Jinmaniprabh Surishwarji honoured with 'Rashtra Ratna'

जैसलमेर। स्वर्णनगरी जैसलमेर में आयोजित तीन दिवसीय भव्य दादागुरुदेव चादर महोत्सव का आज अंतिम दिन विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज को राष्ट्र रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा सम्मान पत्र प्रदान कर दिया गया। साथ ही दादागुरु श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव समिति, जैसलमेर जैन ट्रस्ट और आयोजन से जुड़ी सभी समितियों की ओर से सूरि सम्राट की उपाधि प्रदान की गई। उपाध्याय प्रवर श्री महेंद्रसागरजी को आचार्य पद से अलंकृत किया गया।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने फोन पर दी शुभकामनाएं

दादागुरु श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव समिति के राष्ट्रीय सचिव पदम टाटिया ने बताया कि इस अद्भुत समारोह के हजारों श्रद्धालु साक्षी बने। समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने दूरभाष के माध्यम से अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। राज्यपाल ने कहा कि उनकी स्वयं जैसलमेर आकर चादर महोत्सव में उपस्थित रहने की इच्छा थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों के चलते वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने जैन समाज के सभी श्रद्धालुओं को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी को राष्ट्र रत्न सम्मान मिलने पर शुभेच्छाएँ दीं। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे आयोजनों से राजस्थान में धर्म और अध्यात्म की भावना को नई ऊर्जा मिलती है।

उपाध्याय प्रवर श्री महेंद्रसागरजी को मिला आचार्य पद

महोत्सव के दौरान एक ऐतिहासिक क्षण तब आया जब पूज्य अध्यात्म योगी उपाध्याय प्रवर श्री महेंद्रसागरजी को आचार्य पद से अलंकृत किया गया। यह प्रतिष्ठित उपाधि गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी द्वारा विधिवत प्रदान की गई। इस अवसर पर देश-विदेश से आए साधु-साध्वी भगवंतों, संत-महात्माओं और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। आचार्य पद की यह उपाधि जैन समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण मानी जा रही है। श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ आचार्य श्री महेंद्रसागरजी म. सा. का अभिनंदन किया और इसे चादर महोत्सव का ऐतिहासिक क्षण बताया। इसके साथ ही कार्यक्रम में गणिनी पद समारोह का भी आयोजन किया गया। साध्वी शुभ्रदा श्रीजी को गणिनी पद दिया गया। पूज्य उपाध्याय मनितप्रभ सागरजी की ओर से लिखित द यूनिवर्सल ट्रूथ एवं डॉ विद्युत्प्रभा श्रीजी की पुस्तक गुरुदेव का विमोचन हुआ।

चातुर्मास कार्यक्रम की घोषणा

महोत्सव के समापन अवसर पर साधु साध्वियों के आगामी चातुर्मास प्रवास कार्यक्रम की घोषणा भी की गई, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

भव्य धार्मिक अनुष्ठानों, संत-महात्माओं के सान्निध्य और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच संपन्न हुआ यह चादर महोत्सव आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया। कार्यक्रम गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरी जी की पावन निश्रा में सम्पन्न हो रहा है। इस विराट महोत्सव के प्रेरणास्रोत पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञ सागर जी है । चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा एवं संयोजक जीतो के पूर्व चेयरमैन तेजराज गोलेछा, राष्ट्रीय सचिव पद्म टाटिया, समन्वयक प्रकाश चंद लोढ़ा और समायोजक महेंद्र भंसाली है।

चादर महोत्सव के अंत में सभी श्रद्धालुओं को चादर अभिषेक जल और वासक्षेप को वितरण किया गया।

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