भारत की आर्थिक यात्रा का आईना बना देश का सबसे भरोसेमंद इंडेक्स

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मुंबई: भारत के पूंजी बाजार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर तब दर्ज हुआ जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (एनएसई) ने अपने प्रमुख इक्विटी इंडेक्स निफ़्टी 50 के 30 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। यह विशेष आयोजन मुंबई स्थित एनएसई के एक्सचेंज प्लाजा में आयोजित किया गया, जिसमें देश के वित्तीय क्षेत्र के कई प्रमुख दिग्गज, नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधि, निफ्टी 50 कंपनियों के सदस्य और पूंजी बाजार से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।

इस अवसर पर बोलते हुए सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि निफ्टी 50 के 30 वर्ष पूरे होना केवल एक इंडेक्स की यात्रा का जश्न नहीं है, बल्कि यह भारत के पूंजी बाजार और उसे मजबूत बनाने वाली संस्थाओं की सामूहिक उपलब्धि का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन तीन दशकों में निफ्टी 50 ने कॉरपोरेट भारत की प्रगति को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण आईना बनकर काम किया है। यह न केवल निवेशकों की भावनाओं का पैमाना है, बल्कि बाजार की दिशा बताने वाला एक भरोसेमंद संकेतक भी बन चुका है।
उनके अनुसार इस यात्रा को संभव बनाने में एक्सचेंज, नियामक संस्थाओं, बाजार मध्यस्थों और लाखों निवेशकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

कार्यक्रम में बोलते हुए एस. गुरुमूर्ति ने भारत की वित्तीय व्यवस्था की खासियतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का वित्तीय बाजार कई देशों से अलग तरीके से विकसित हुआ है। जहां कई देशों में बाजार केवल वित्तीय नवाचारों के आधार पर विकसित हुए, वहीं भारत में मजबूत संस्थानों, सख्त नियामकीय निगरानी और विवेकपूर्ण आर्थिक संस्कृति ने बाजार को आकार दिया।

एनएसई के चेयरमैन श्रीनिवास इंजेटी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में निफ्टी 50 एक साधारण बाजार सूचकांक से आगे बढ़कर भारत की आर्थिक गति और उद्यमिता का प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के दौर में एक वैज्ञानिक और भरोसेमंद इंडेक्स के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी। आज यह इंडेक्स निवेशकों के विश्वास, व्यवसायों की ऊर्जा और देश की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण संकेतक बन चुका है।

इंजेटी के अनुसार जैसे-जैसे भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे एनएसई जैसे मजबूत संस्थान और निफ्टी 50 जैसे पारदर्शी बेंचमार्क लाखों निवेशकों की बचत को देश की प्रगति को आगे बढ़ाने वाले उद्यमों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। तीन दशकों की यह यात्रा केवल एक इंडेक्स की कहानी नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है जो तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत संस्थानों और बढ़ते निवेशक विश्वास के साथ वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
(अनिल बेदाग)

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