जयपुर। हिंदू नव वर्ष का दूसरा महीना वैशाख शुरू होते ही धार्मिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। स्कंद पुराण में वैशाख मास को अत्यंत पुण्यदायी और भगवान भगवान विष्णु का प्रिय माह बताया गया है। इस दौरान पूजा-पाठ, जप-तप, उपवास और दान-पुण्य का विशेष महत्व रहता है। ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार वैशाख मास में विशेष रूप से जलदान का महत्व है।
इस माह में राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना और जरूरतमंदों को जूते-चप्पल व वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इससे मानसिक कष्टों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। वहीं सूर्योदय के बाद तक सोने, तामसिक भोजन करने और जल की बर्बादी से बचने की सलाह दी गई है।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार 5 अप्रैल- विकट संकष्टी, 13 अप्रैल- वरूथिनी एकादशी,14 अप्रैल- मेष संक्रांति,15 अप्रैल- मासिक शिवरात्रि, 17 अप्रैल- वैशाख अमावस्या,18 अप्रैल- पराशर ऋषि जयंती,19 अप्रैल- परशुराम जयंती व अक्षय तृतीया,20 अप्रैल- संकर्षण चतुर्थी,21 अप्रैल- शंकराचार्य जयंती,22 अप्रैल- स्कंद षष्ठी,23 अप्रैल- गंगा सप्तमी,25 अप्रैल- जानकी नवमी,27 अप्रैल- मोहिनी एकादशी और 28 अप्रैल- भौम प्रदोष व्रत रहेगा।
वैशाख माह को दान, सेवा और संयम का प्रतीक माना गया है, जिसमें जलदान को सबसे बड़ा पुण्य बताया गया है।



















