इच्छाधारी बालाजी मंदिर का त्रयोदश पाटोत्सव धूमधाम से मनाया

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The 13th Patotsav of the Ichchhadhari Balaji Temple
The 13th Patotsav of the Ichchhadhari Balaji Temple

जयपुर। श्री सीताराम सेवा आश्रम बांसिया रोड, मोहरा कलां में तीन दिवसीय भजन संध्या में अनेक आयोजन हुए। इस मौके पर सुरेंद्रदास महाराज के सानिध्य में श्री शिव मंदिर के द्वादश पाटोत्सव एवं इच्छाधारी बालाजी मंदिर का त्रयोदश पाटोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर अनेक साधु-संतों और गणमान्य लोगों की उपस्थित रहीं।

आयोजन के तहत कलश यात्रा, नानी बाई रो मायरो कथा, रामार्च अनुष्ठान, नौ कुंडीय श्रीराम महायज्ञ, भजन संध्या और प्रसादी वितरण के आयोजन हुए। आयोजन में सियाराम बाबा की बगीची ढहर के बालाजी सीकर रोड के महंत हरिशंकरदास वेदांती महाराज, मेहंदीपुर बालाजी के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज, सियाराम दास महाराज कनक बिहारी मंदिर गलता गेट, महंत हरिदास महाराज टीला धाम, महंत भीमादास महाराज जसवंतपुरा, महंत घनश्याम दास बापू, राजकोट, महंत गणेशदास महाराज अयोध्याजी और महंत घनश्याम दास महाराज कोटपुतली सहित अनेक संतों ने भी आयोजन में पहुंचकर भक्तों के समक्ष आशीवर्चन दिए।

नानी बाई रो मायरो की प्रख्यात कथा वाचक अनन्या शर्मा ने कथा प्रवचन में प्रसंगों से भक्तों को भाव विभोर कर दिया। कथा वाचक अनन्या शर्मा ने भक्तों को बताया कि नानी बाई रो मायरो (नरसी का भात) भक्त नरसी मेहता द्वारा अपनी पुत्री नानी बाई के ससुराल में भगवान कृष्ण द्वारा मायरा भरने की चमत्कारिक कथा है। यह राजस्थान की भक्ति परंपरा का हिस्सा है, जो विश्वास, समर्पण और कृष्ण की भक्त के प्रति आस्था को दर्शाता है।

यह कथा नरसी मेहता की निर्धनता के बावजूद भगवान पर अटूट भरोसे को उजागर करती है। यह कथा दर्शाती है कि सच्चा भक्त जब भगवान को याद करता है, तो वे स्वयं उसकी लाज बचाने आते हैं। उन्होंने बताया कि यह कथा कृष्ण की भक्त-वत्सलता और ‘नरसी का भात’ के रूप में समर्पण की पराकाष्ठा का अनुभव कराती है।

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