श्री गलता पीठ में 10 दिवसीय रामानुज जयन्ती महोत्सव का आयोजन

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जयपुर। रामानुज सम्प्रदाय की उत्तर भारत की प्रमुख श्री वैष्णव पीठ उत्तर तोदाद्रि श्री गलता जी में श्री वैष्णव मण्डल, रामानुजाचार्य वेदान्त गुरुकुल एवं श्री गलता पीठ के अर्चकों द्वारा 16 अप्रैल से मनाए जा रहे 10 दिवसीय श्री रामानुज जयंती महोत्सव का भव्य समापन रविवार को हुआ।

श्री वैष्णव मण्डल के मंत्री रमेश जी शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर दस दिन पर्यन्त नियमित रूप से प्रतिदिन तिरूमंजन (अभिषेक), वैदिक विधि से पूजन, अष्टोत्तरशत तुलसी अर्चना, पाठ, हवन, आदि किए गए।

प्रतिदिन प्रातः शरणागति गद्य, श्री रंगगद्य, श्री वैकुण्ठ गद्य पाठ तथा सायं स्तोत्ररत्न, यतिराजविंशति, रामानुज प्रपत्ति, पंचधाटी, भजयतिराजं स्तोत्र आदि के पाठ संपन्न हुए तथा तीर्थ, गोष्ठी प्रसादी का वितरण भी किया गया।

रामानुज जयंती 22 अप्रैल के दिन प्रातः श्री गलता पीठ स्थित श्री रामानुज कीर्ति स्तंभ की अर्चना की गई तथा पँचधाटी स्तोत्र, श्री रामानुज चालीसा आदि से कीर्ति स्तंभ की परिक्रमा करते हुए प्रभात फेरी निकाली गई।

इसके पश्चात श्री गलता पीठ स्थित श्री रामानुजाचार्य जी के अति प्राचीन मूल विग्रह एवं उत्सव विग्रह का वैदिक विधि से मंत्रोच्चरण के साथ पंचामृत, पंचमेवा, फलों, पंचद्रव्यों, सर्वऔषधि, सहस्त्रधारा, फलों के रस इत्यादि से तिरुमंजन (अभिषेक) किया गया। दिव्य प्रबन्ध व स्तोत्र पाठ आदि का वाचन विद्वानों द्वारा किया गया। श्री रामानुज स्वामी जी का तुलसी पुष्प से सहस्त्रार्चन किया है।

श्री रामानुज जयंती के दस दिवसीय महोत्सव के अंतिम दिन श्री गलता पीठ में श्री रामानुजाचार्य की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा में विद्वानों द्वारा दिव्य प्रबन्ध एवं वैदिक मंत्रोच्चारण किया गया। दक्षिण भारत से पधारे कलाकारों द्वारा वाद्यम, नादस्वरम, तालम सहित अन्य वाद्य यंत्र बजाए गए। सभी श्री वैष्णव भक्तों ने रामानुजाचार्य जी के जीव कारुण्य व सामाजिक समरसता को स्मरण करते हुए समस्त जीवों के कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर गलतापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य, युवाचार्य स्वामी राघवेंद्राचार्य, मुरली मनोहर मन्दिर के महन्त स्वामी राघवेन्द्राचार्य, गोदा हरिदेव मंदिर वृन्दावन के स्वामी श्री नारायणाचार्य जी, बस्सी टिबड़ेवाला बालाजी मंदिर के स्वामी त्रिविक्रमाचार्य जी, नृसिंह मंदिर के महन्त जी स्वामी नारायणाचार्य जी सहित अनेकों सन्त- महन्त, महात्मा उपस्थित रहे।

सभी को शठारी दी गयी। इसके पश्चात सभी ने तुलसी, चरणामृत, गोष्ठी प्रसादी आदि ग्रहण किए । इस अवसर पर श्री पिल्लैलोकाचार्य जी द्वारा विरचित अर्थपञ्चक वेदान्त वेदान्त का विमोचन भी किया गया। पुस्तक श्री वैष्णव मण्डल एवं रामानुजाचार्य वेदान्त गुरुकुल श्री गलता पीठ द्वारा प्रकाशित की गई।

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