पार्किंसन पर बड़ी जीत: डीबीएस सर्जरी से बुजुर्ग को मिली नई जिंदगी

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Major Victory Against Parkinson's: DBS Surgery Gives Elderly Man a New Life
Major Victory Against Parkinson's: DBS Surgery Gives Elderly Man a New Life

जयपुर। सीकर के 68 वर्षीय एक बुजुर्ग के लिए पार्किंसन बीमारी के साथ जीवन दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा था, लेकिन जयपुर में की गई आधुनिक डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) सर्जरी ने उन्हें नई उम्मीद और बेहतर जीवन दिया है।

वर्ष 2015 में बीमारी का पता चलने के बाद मरीज लगातार दवाइयां ले रहे थे। शुरुआती दौर में राहत मिली, लेकिन समय के साथ दवाइयों का असर कम होता गया और समस्या बढ़ती गई। हालत यह हो गई कि कभी वे ठीक से चल नहीं पाते थे, तो कभी शरीर में अत्यधिक कंपन और अनियंत्रित मूवमेंट होने लगते थे।

दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका था और छोटे-छोटे कामों के लिए भी उन्हें परिवार पर निर्भर रहना पड़ता था। बीमारी का असर मानसिक स्थिति पर भी पड़ा। लगातार परेशानी के चलते मरीज को चिंता, उदासी और भ्रम जैसी समस्याएं भी होने लगीं।

जांच में सामने आई गंभीर स्थिति

नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर में जांच के दौरान मरीज की स्थिति मध्यम से गंभीर स्तर पर पाई गई। शरीर का बायां हिस्सा अधिक प्रभावित था और चलना-फिरना, खड़े होना या हाथों का सामान्य उपयोग करना भी बेहद कठिन हो गया था।

डीबीएस सर्जरी बनी उम्मीद

डॉक्टरों ने मरीज को डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) सर्जरी की सलाह दी। सर्जरी से पहले विशेष परीक्षण किया गया, जिसमें दवाइयों के असर का मूल्यांकन किया गया और सकारात्मक परिणाम मिलने पर सर्जरी का निर्णय लिया गया।

डीबीएस तकनीक में मस्तिष्क के एक विशेष हिस्से में छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जो हल्के इलेक्ट्रिक सिग्नल के जरिए दिमाग की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। यह दवाइयों जैसा ही असर देता है, लेकिन अधिक स्थिर और लंबे समय तक प्रभावी रहता है।

5-6 घंटे चली सर्जरी, मिला बेहतर परिणाम

करीब 5 से 6 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी के दौरान मरीज को कुछ समय के लिए जागृत रखा गया, ताकि तुरंत सुधार का आकलन किया जा सके। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और अत्याधुनिक तकनीक की मदद से यह सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

दो हफ्तों में 80-90% सुधार

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब वे कम दवाइयों के साथ खड़े हो पा रहे हैं, बेहतर तरीके से चल पा रहे हैं और हाथों की मूवमेंट भी पहले से काफी सुधर गई है। मात्र दो सप्ताह में उन्होंने अपने दैनिक कार्य फिर से शुरू कर दिए और खुद को 80 से 90 प्रतिशत बेहतर महसूस कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और डीबीएस विशेषज्ञ डॉ. वैभव माथुर ने बताया कि कई मामलों में एक समय के बाद दवाइयां प्रभावी नहीं रहतीं, ऐसे में डीबीएस एक कारगर विकल्प बनता है। उन्होंने बताया कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण की मदद से मरीज के लक्षणों और उपचार को और अधिक सटीक बनाया जा रहा है।

फैसिलिटी डायरेक्टर बलविंदर सिंह वालिया ने कहा कि अब राजस्थान के मरीजों को इस तरह की उन्नत सर्जरी के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। वहीं क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप कुमार गोयल ने बताया कि पार्किंसन केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करने वाली स्थिति है, जिसमें समय पर उपचार बेहद जरूरी है।

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