गोविंददेवजी मंदिर में रथयात्रा महोत्सव: प्राचीन चांदी के रथ में होगी गौर गोविंद की परिक्रमा

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Rath Yatra Festival at Govind Dev Ji Temple
Rath Yatra Festival at Govind Dev Ji Temple

जयपुर। आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के अवसर पर गुरूवार को गोविंददेवजी मंदिर में भगवान गौर गोविंद की पारंपरिक रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली जाएगी। इस दौरान भगवान गौर गोविंद को करीब 250 वर्ष पुराने चांदी के रथ में विराजमान कर मंदिर परिसर की परिक्रमा कराई जाएगी। रथयात्रा के साथ ही जयपुर और ब्रज क्षेत्र की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का निर्वहन होगा।

मंदिर प्रशासन के अनुसार सुबह 6 बजे से विशेष धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे। भगवान की पूजा-अर्चना के बाद गौर गोविंद की प्रतिमा को प्राचीन चांदी के रथ में विराजमान कर मंदिर परिसर की चार प्रदक्षिणाएं कराई जाएंगी। इसके साथ ही रथयात्रा महोत्सव संपन्न होगा। यह परंपरा करीब ढाई सौ वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है।

मंदिर परंपरा के अनुसार ठाकुर श्री गोविंददेवजी का श्रीविग्रह वृंदावन में श्रील रूप गोस्वामी को प्राप्त हुआ था। बाद में श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने स्वरूप के रूप में अष्टधातु से गौर गोविंद का विग्रह तैयार करवाकर वृंदावन भेजा, जिसे गोविंददेवजी के दाहिने पार्श्व में स्थापित किया गया।

मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन के दौरान श्री चैतन्य महाप्रभु इसी गौर गोविंद विग्रह में समाहित हो गए थे। इसी आस्था के चलते प्रतिवर्ष गौर गोविंद की विशेष पूजा और रथयात्रा निकाली जाती है।

रथयात्रा महोत्सव से पूर्व मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और श्री बलभद्र के समक्ष आकर्षक फूल बंगला झांकी सजाई गई, जिसमें हरिनाम संकीर्तन का भाव प्रस्तुत किया गया। यह झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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