500 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम: मौसी के घर की धुलाई करेंगे श्रद्धालु

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जयपुर। भगवान श्रीजगन्नाथ के अनसर (बीमारी) काल के समापन के बाद जयपुर में बुधवार को करीब 500 वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। भगवान श्रीजगन्नाथ के पुनः स्वस्थ रहने और दोबारा बीमार नहीं पड़ने की कामना के साथ श्रद्धालु उनकी मौसी गुंडीचा रानी के घर (शिव संस्कार भवन) की विशेष साफ-सफाई करेंगे। मान्यता है कि इस सेवा से भगवान का निवास स्थान शुद्ध और शीतल बना रहता है।

जानकारी के अनुसार भगवान श्रीजगन्नाथ 15 दिन तक अनसर अवधि में रहने के बाद बुधवार को पूर्ण स्वस्थ होकर बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर मौसी गुंडीचा रानी के घर सुंदरावल (नगर भ्रमण) के लिए प्रस्थान करेंगे। बुधवार अलसुबह श्रद्धालु मौसी के घर की सफाई का कार्य करेंगे।

गुरु वृंदावन धाम की ओर से आयोजित इस सेवा के तहत चांदपोल स्थित गुरु वृंदावन धाम, दामोदर मंदिर और रामनिवास बाग स्थित गुंडीचा रानी के घर (शिव संस्कार भवन) में सुबह 4:30 बजे से भक्त झाड़ू, पोछा और जल से फर्श, दीवारों, छत तथा कुंज गलियों की सफाई करेंगे। इसके बाद श्रीजगन्नाथ सेवा समिति, जयपुर की ओर से मंदिर परिसर को सजाया जाएगा और बुधवार को विशेष साफ-सफाई के साथ भगवान के स्वागत की तैयारियां पूरी की जाएंगी।

गुरु वृंदावन धाम के अध्यक्ष अभिमन्यु दास ने बताया कि यह परंपरा करीब 500 वर्ष पुरानी है। मान्यता है कि स्वयं श्री चैतन्य महाप्रभु ने लगभग 500 वर्ष पहले पुरी में अपने हाथों से गुंडीचा मंदिर की जल से सफाई की थी। तभी से भक्त भगवान के मौसी घर को शीतल, स्वच्छ और पवित्र बनाने के उद्देश्य से यह सेवा करते हैं। इसे बाहरी सफाई के साथ-साथ अंतःकरण की शुद्धि का भी प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीजगन्नाथ जब वृंदावन (सुंदरावल) जाने के भाव में होते हैं तो उनकी आंखें बड़ी हो जाती हैं और वे नौ दिन तक मौसी के घर विशेष स्नेह और सेवा के बीच विश्राम करते हैं। यहां उन्हें विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। इसके बाद भगवान पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं।

आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में सेवा कार्य में भाग लेने और भगवान श्रीजगन्नाथ के सुंदरावल महोत्सव में शामिल होने का आह्वान किया है।

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