जयपुर। इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए देशभर में पहचान रखने वाला शिक्षा नगर कोटा अब तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। शहर के तलवंडी क्षेत्र से शुरू हुई ‘एआई चश्मा’ पहल इस बदलाव का प्रतीक बनकर उभरी है। यह स्टार्टअप दर्शाता है कि कोटा की युवा प्रतिभा अब केवल प्रतियोगी परीक्षाओं और पारंपरिक करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित उत्पाद विकसित करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
इस स्टार्टअप से जुड़े प्रांशु गर्ग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू) के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे स्थापित तकनीकी केंद्रों के बजाय कोटा से इस परियोजना की शुरुआत कर यह संदेश दिया है कि तकनीकी उद्यमिता के लिए बड़े महानगर ही एकमात्र विकल्प नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर भी नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है।
‘एआई चश्मा’ की अवधारणा पारंपरिक चश्मे को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर आधारित है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑडियो, संचार और वियरेबल टेक्नोलॉजी जैसी सुविधाओं को सामान्य चश्मे में समाहित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उपयोगकर्ताओं को स्मार्ट तकनीक का सहज अनुभव मिल सके।
मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और अन्य डिजिटल उपकरणों में तेजी से बदलाव के बावजूद चश्मे का स्वरूप लंबे समय तक पारंपरिक बना रहा। ऐसे में ‘एआई चश्मा’ जैसी पहल वियरेबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है और भविष्य की स्मार्ट लाइफस्टाइल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही है।
यह पहल इस बात का संकेत है कि कोटा अब केवल कोचिंग हब नहीं, बल्कि शोध, नवाचार, तकनीकी विकास और उत्पाद निर्माण का उभरता केंद्र भी बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे स्टार्टअप भविष्य में कोटा को तकनीकी उद्यमिता के क्षेत्र में भी नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।



















