चांदपोल बाज़ार स्थित रामचंद्र जी मंदिर में शिव तत्व कथा का आयोजन

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जयपुर। चांदपोल बाज़ार स्थित ठिकाना मंदिर श्री रामचंद्र जी में आयोजित श्री पार्वती चरित्र और श्री शिव तत्व कथा के दौरान अयोध्या जी के जानकी घाट पीठाधीश्वर रामशंकर वेदांती ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य स्वरूप का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्री रामचरितमानस’ के बालकाण्ड का संदर्भ देते हुए बताया कि भगवान शिव और श्री राम के बीच सेवक, स्वामी और सखा—तीनों रूपों का अद्भुत और अनोखा संबंध है।

अयोध्या से आए पीठाधीश्वर रामशंकर वेदांती ने रामचरितमानस की चौपाइयों का भावार्थ समझाते हुए कहा भगवान शिव स्वयं को श्री राम का सबसे बड़ा सेवक मानते हैं। त्रेतायुग में प्रभु श्री राम की सेवा करने के लिए ही भगवान शिव ने अपने 11वें रुद्र अवतार के रूप में ‘हनुमान’ जी का रूप धारण किया और आजीवन श्री राम के अनन्य दास बने रहे। लंका विजय से पूर्व जब श्री राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की, तब प्रभु ने कहा कि शिव के समान उन्हें कोई प्रिय नहीं है।

यहाँ श्री राम शिव जी को और शिव जी श्री राम को अपना आराध्य मानते हैं। शिव जी और श्री राम का रिश्ता अटूट मित्रों जैसा है। माता सीता के वियोग में शिव जी ने प्रभु राम के दुख को स्वयं महसूस किया और सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहे।

कथा के दौरान रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना की पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए वेदांती ने बताया कि जब ऋषियों ने पूछा कि ‘रामेश्वर’ का अर्थ क्या है, तो श्री राम ने कहा— “जो राम के ईश्वर हैं, वे रामेश्वर हैं।” वहीं प्रकट होकर भगवान शिव ने कहा— “राम जिसके ईश्वर हैं, वह रामेश्वर है।”

अंत में ऋषियों ने निष्कर्ष दिया कि हरि और हर शिव एक ही हैं, दोनों में कोई भेद नहीं है। उन्होंने संदेश दिया कि जो व्यक्ति शिव जी की निंदा करके राम की भक्ति करता है या राम का अपमान करके शिव को पूजता है, उसकी भक्ति कभी पूर्ण नहीं हो सकती।

मंदिर के महंत नरेंद्र तिवाड़ी ने जानकारी दी कि जारी कथा श्रृंखला के अंतर्गत अगले चरण में श्री शिव-पार्वती विवाह का भव्य प्रसंग एवं उत्सव अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरि-हर भक्ति के रस का आनंद ले रहे हैं।

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