म्यूल अकाउंट से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा, एक आरोपी गिरफ्तार

0
30

जयपुर। माणकचौक थाना पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ‘म्यूल हंटर’ अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने महेश बबेरवाल (24) को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी कॉल, एसएमएस, ओटीपी और फिशिंग लिंक के जरिए लोगों से बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर ठगी की रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर करवाता था। बाद में रकम नकद निकालकर खर्च कर दी जाती थी।

पुलिस उपायुक्त जयपुर उत्तर करण शर्मा ने बताया कि राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम और संदिग्ध बैंक खातों व हॉटस्पॉट के खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष ‘म्यूल हंटर’ अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत माणकचौक थानाधिकारी राकेश ख्यालिया के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी अनुसंधान के आधार पर कार्रवाई की।

म्यूल खाते में सीधे आती थी ठगी की रकम

पुलिस के अनुसार 18 सितंबर को माणकचौक थाने में प्रकरण दर्ज हुआ। जांच में सामने आया कि जौहरी बाजार स्थित पीएनबी शाखा का खाता संख्या 3553000100254077, खाताधारक महेश बबेरवाल, साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जांच के दौरान इस खाते के खिलाफ राजस्थान, बिहार और गुजरात से संबंधित चार साइबर शिकायतें दर्ज मिलीं। इन मामलों में ठगी की रकम पहली लेयर में सीधे इसी खाते में जमा कराई गई थी। इसके बाद रकम नकद निकालने या दूसरे खातों में ट्रांसफर करने की बात सामने आई।

48 घंटे तक तकनीकी निगरानी

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जयपुर उत्तर प्रथम आलोक सिंघल और सहायक पुलिस आयुक्त माणकचौक पीयूष कविया के निर्देशन में पुलिस टीम ने बैंक खाते का स्टेटमेंट और केवाईसी दस्तावेज हासिल किए। इनका राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के डेटा से मिलान किया गया। इससे संदिग्ध खाते के लेन-देन और साइबर शिकायतों के बीच संबंध सामने आया।

पुलिस के अनुसार कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी ने केवाईसी में दर्ज पता और मोबाइल नंबर बदल दिए थे तथा पुराने नंबर बंद कर दिए थे। टीम ने नए डिजिटल फुटप्रिंट, नेटवर्क गतिविधियों, आईपी और टावर लोकेशन का विश्लेषण किया। तकनीकी सूचना के आधार पर आरोपी के नए मोबाइल नंबर और वर्तमान लोकेशन की पहचान की गई। इसके बाद करीब 48 घंटे तक लगातार तकनीकी निगरानी रखकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

गोपनीय जानकारी जुटाकर करते थे ठगी

पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि गिरोह लोगों के नाम-पते और अन्य गोपनीय जानकारी जुटाकर फर्जी कॉल, एसएमएस, ओटीपी और लुभावने फिशिंग लिंक भेजता था। झांसे में लेने के बाद पीड़ितों से बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर ठगी की रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। रकम मिलते ही उसे नकद निकालकर ऐशो-आराम और मौज-मस्ती में खर्च किया जाता था।

पुलिस से बचने और पहचान छिपाने के लिए गिरोह के सदस्य लगातार सिम कार्ड बदलते थे। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है। पुलिस को उसके जरिए अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के अन्य सदस्यों और कई अन्य वारदातों का खुलासा होने की संभावना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here