जयपुर। जयपुर में सुहाग पर्व सिंजारा शुक्रवार को विभिन्न मंदिरों में अपार भक्तिभाव एवं उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरों में ठाकुरजी को विशेष रूप से लहरिया पोशाक धारण कराकर झूले में विराजमान किया गया, जहां भक्तों ने बड़े भाव से ठाकुरजी को झुलाया और घेवर का भोग लगाया।
इसी कड़ी में सुभाष चौक, दरीबा पान स्थित ‘श्री शुक संप्रदाय आचार्य पीठ, श्री सरस निकुंज’ में बड़े दादागुरु सरकार स्वामी सरस माधुरी शरण महाराज की 172वीं नीलमणि जन्म जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में सिंजारा पूजन एवं झूला झांकी का भव्य आयोजन हुआ। इस दौरान ठाकुर राधा सरस बिहारी जी सरकार को विशेष रूप से ताम्र-रजत निर्मित और सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित सुंदर झूले में विराजमान कर विशेष सेवा-पूजा की गई।
श्री शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज ने प्रियालाल किशोरी जी सरकार को लहरिया चुनरी धारण कराकर विशेष श्रृंगार किया। साथ ही, श्रीचरणों एवं हस्तकमलों में पारंपरिक मेहंदी अर्पित की गई। ठाकुरजी को विभिन्न मिष्ठानों और पारंपरिक घेवर का भोग लगाया गया।
उत्सव के दौरान श्री सरस परिकर के वैष्णवजनों ने सामूहिक रूप से तीज महोत्सव और झूला उत्सव के पदों का भावपूर्ण गायन किया। “परम पियारो तिजारो त्योंहार”, “आज सिंजारा री रैन, सखी हिलमिल जुगल झुलावो री”, “प्यारी झूलिये हिंडोरे मन हरष बढ़ाये” और “झूलन को आई सा राधा रंग भीनी” जैसी भक्तिमय पदावलियों की प्रस्तुति से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
पूरे निकुंज परिसर को आकर्षक पुष्प बंदनवारों से सजाया गया था। देर रात तक श्रद्धालु झूला झांकी के दर्शन के लिए पहुंचते रहे, जिसके बाद सभी को घेवर का प्रसाद वितरित किया गया।
श्री सरस निकुंज के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि जन्म जयंती महोत्सव के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में वैष्णव परंपराओं, राजस्थानी संस्कृति और तीज-सिंजारा उत्सव की भक्ति भावना का बेहद सुंदर संगम देखने को मिला।



















