जयपुर। गुलाबी नगरी की ऐतिहासिक गलियां बुधवार को 208 साल पुरानी धार्मिक परंपरा की साक्षी बनने जा रही हैं। श्री गोपालजी महाराज की 208वीं हेड़े की परिक्रमा सुबह भक्तिमय सादगी के साथ शुरू होकर शाम ढलते-ढलते भव्य राजसी शोभायात्रा का रूप लेगी। हाल ही में इस परिक्रमा के पोस्टर का विमोचन सुभाष चौक, पानों का दरीबा स्थित श्री सरस निकुंज में अलबेली माधुरी शरण महाराज द्वारा किया गया।
सुरक्षा के लिहाज से परिक्रमा मार्ग में चार थानों की पुलिस अलग-अलग समय तैनात रहेगी, जबकि एक थाने का सशस्त्र जाब्ता और निजी सुरक्षाकर्मी आभूषणों की सुरक्षा के लिए पूरे समय साथ चलेंगे।
सुबह 6 बजे सफेद पोशाक और पगड़ी में रवाना होंगे श्रद्धालु
परिक्रमा आयोजन से जुड़े कुंज बिहारी धोतीवाले ने बताया कि पदयात्रा सुबह 6 बजे गोपालजी का रास्ता स्थित श्री नृसिंहजी मंदिर से शुरू होगी। इसमें श्रद्धालु पारंपरिक सफेद धोती-कुर्ता और मोतिया रंग की पगड़ी पहनकर भजन-कीर्तन करते हुए शामिल होंगे। जौहरी बाजार के रास्ते स्थित मंदिरों में देव दर्शन करते हुए भक्त मंडली सुबह 9 बजे सांगानेरी गेट पहुंचेगी।
यहाँ से यात्रा धूलेश्वर महादेव, हाथी बाबू का बाग, नाहरी का नाका (पंचमुखी हनुमानजी), धूलकोट, गढ़ गणेश, नहर के गणेशजी, धोती वालों की बगीची, बद्री नारायणजी की डूंगरी और लाल डूंगरी होते हुए दोपहर में गलता जी पहुंचेगी, जहाँ घाट के बालाजी मंदिर में विश्राम होगा।
दोपहर विश्राम के बाद घाट की गूणी स्थित फतेह चंद्रमाजी मंदिर में बालकों को बहुमूल्य जेवरों व विशेष पोशाक से गोपालजी के स्वरूप में सजाया जाएगा। श्रृंगार के पश्चात स्वरूपों को चांदी की पालकी में विराजमान कर शाम 5 बजे महाआरती की जाएगी।
लवाजमे के साथ शाम 6 बजे निकलेगी राजसी शोभायात्रा
सांगानेरी गेट से शाम 6 बजे हेड़े की परिक्रमा विशाल शोभायात्रा में बदल जाएगी। हाथी, घोड़े, ऊंट, शहनाई वादन और बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच शोभायात्रा जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, चौड़ा रास्ता और गणगौर के रास्ते से होते हुए गोपालजी का रास्ता स्थित निज मंदिर पहुंचेगी। रास्तेभर श्रद्धालु पालकी में विराजमान गोपालजी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।



















