जयपुर। वैशाली नगर स्थित बीएपीएस स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर में मंगलवार को जलझुलनी एकादशी का उत्सव भक्ति-भाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में बारिश के नवीन जल से आकर्षक जलकुंड तैयार किया गया, जिसमें ठाकुरजी को विधिवत नौका विहार कराया गया। भजन-कीर्तन और जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर ठाकुरजी के दर्शन किए। अनेक भक्तों ने निर्जला उपवास रखकर आराधना की। पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों का क्रम चलता रहा।
उत्सव के दौरान वेदोक्त विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन किया गया। भक्तों ने श्रद्धापूर्वक आराधना में सहभागिता की। इसके बाद ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के बीच गणेशजी का विधिवत विसर्जन किया गया। संतों और भक्तों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया।
उत्सव के दौरान संतों ने जलझुलनी एकादशी की आध्यात्मिक महिमा बताते हुए कहा कि मान्यता के अनुसार बलिराजा ने अपनी भक्ति से भगवान को प्रसन्न कर उन्हें चार माह तक अपने यहां रहने के लिए आग्रह किया था। चातुर्मास के चार महीनों में दो माह पूर्ण होने पर जलझुलनी एकादशी के दिन ठाकुरजी के करवट बदलने की परंपरा है। ठाकुरजी का करवट बदलना जीवन में परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।
संतों ने कहा कि ठाकुरजी के करवट बदलने से हमें भी जीवन में आवश्यक परिवर्तन का संकल्प लेना चाहिए। सद्गुणों को अपनाना और अवगुणों का त्याग करना ही वास्तविक परिवर्तन है।

संतों ने नौका विहार के प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि जिस प्रकार ठाकुरजी नौका विहार कर रहे हैं, उसी प्रकार यदि मनुष्य अपने चित्त को भगवान से जोड़ ले तो वह संसार रूपी भवसागर को पार कर भगवान के धाम को प्राप्त कर सकता है।
इस प्रकार जलझुलनी एकादशी का उत्सव धार्मिक परंपरा के साथ भक्तों के लिए भक्ति, आत्मचिंतन और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश लेकर आया।



















