झालाना का ‘राणा’ कहां गया ?12 दिन बाद भी वन विभाग के हाथ खाली

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जयपुर। झालाना लेपर्ड सफारी की पहचान बन चुके लेपर्ड राणा के लापता होने के 12 दिन बाद भी वन विभाग को उसका कोई सुराग नहीं मिला है। बुधवार को वन विभाग की टीमें दिनभर झालाना जंगल के अलग-अलग हिस्सों में राणा की तलाश करती रहीं, लेकिन कोई ठोस संकेत नहीं मिला। लगातार तलाश के बावजूद राणा का पता नहीं चलने से वन्यजीव प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है।

राणा की तलाश के लिए डीएफओ आशीष व्यास, एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत और रेंजर विजयपाल यादव के नेतृत्व में टीम ने जंगल के संभावित क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चलाया। एमएनआईटी के आसपास के क्षेत्र में भी वन विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं। विभाग अब राणा की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त कैमरा ट्रैप लगाने की तैयारी कर रहा है।

बारिश के बाद बढ़ी घास बनी चुनौती

डीएफओ आशीष व्यास के अनुसार हाल में हुई बारिश के बाद झालाना जंगल में घास काफी बढ़ गई है। घनी और ऊंची घास के कारण लेपर्ड की तलाश चुनौतीपूर्ण हो गई है। जंगल का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण प्रत्येक हिस्से की निगरानी में भी समय लग रहा है। ऐसे में कैमरा ट्रैप और अन्य निगरानी माध्यमों से राणा की मौजूदगी का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

निगरानी और स्टाफ पर सवाल

राणा के लगातार लापता रहने के बीच झालाना जंगल की निगरानी व्यवस्था और स्टाफ की कमी का मुद्दा भी उठ रहा है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि जंगल में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के साथ स्टाफ की कमी दूर करने की जरूरत है। वहीं सफारी ट्रैक के रखरखाव का काम भी किया जाना है।

वन विभाग के अनुसार झालाना में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। राणा की तलाश के लिए अतिरिक्त कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही स्टाफ की कमी दूर करने की दिशा में भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

लगातार जारी है तलाश

झालाना की पहचान बन चुके राणा के 12 दिन से दिखाई नहीं देने के बाद वन विभाग लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहा है। जंगल के विभिन्न हिस्सों के साथ एमएनआईटी क्षेत्र में भी निगरानी की जा रही है। कैमरा ट्रैप के जरिए उसकी गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास जारी है। फिलहाल राणा का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।

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