जयपुर। दिल्ली रोड स्थित प्रसिद्ध श्री खोले के हनुमानजी मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन संत मुरलीधर महाराज ने श्रीरामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में भगवान श्रीराम के आदर्श शासन रामराज्य, भाईचारे, त्याग, मर्यादा और लोककल्याण का संदेश दिया गया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
रामराज्य में न्याय, धर्म और सदाचार का महत्व
संत मुरलीधर महाराज ने वानरों और निषादराज की विदाई, रामराज्य वर्णन, अयोध्या की रमणीयता, सनकादिक मुनियों के आगमन एवं संवाद तथा हनुमानजी के माध्यम से भरतजी के प्रश्न और भगवान श्रीराम के उपदेश सहित अनेक प्रसंग सुनाए। रामराज्य का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल आदर्श शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा पर आधारित समाज की परिकल्पना है। न्याय, धर्म और सदाचार के साथ लोककल्याण को प्राथमिकता देना ही इसका मूल भाव है।
भरतजी के प्रसंग से त्याग और कर्तव्यपालन की प्रेरणा
भरतजी के प्रश्नों और भगवान श्रीराम के उपदेशों के माध्यम से महाराज ने त्याग, भाईचारे और कर्तव्यपालन की महत्ता बताई। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को विवेक, विनम्रता और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। पारिवारिक संबंधों में प्रेम, सम्मान और त्याग से ही आदर्श जीवन की स्थापना होती है।
भक्ति का आधार निष्कपट प्रेम और समर्पण
सनकादिक मुनियों के आगमन और संवाद के प्रसंगों के माध्यम से संत मुरलीधर महाराज ने आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि भगवान के लिए बाहरी वैभव से अधिक महत्व भक्त के निष्कपट प्रेम, विनम्रता और समर्पण का है। सच्ची भक्ति के लिए अहंकार का त्याग, सेवा भावना और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास आवश्यक है।
श्रीरामचरितमानस के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को पारिवारिक मर्यादा, निष्काम सेवा, आदर्श जीवन और आध्यात्मिक चेतना अपनाने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्री खोले के हनुमानजी मंदिर परिसर में 20 से 28 अक्टूबर तक आयोजित यह नौ दिवसीय श्रीराम कथा श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ते हुए धर्म, संस्कार, सेवा और लोक कल्याण की भावना को जीवन में उतारने का संदेश दे रही है।

















