जयपुर। राजस्थान के लेखक विश्वनाथ तंवर की पुस्तक ‘मैं और मेरा सरदारशहर’ का लोकार्पण सिविल लाइंस स्थित सेलवास लाउंज में आयोजित ‘लेखक से संवाद’ कार्यक्रम में किया गया। संस्मरण, रिपोर्ताज, रेखाचित्र और ऐतिहासिक घटनाओं से परिपूर्ण इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह में देशभर से आए 50 से अधिक साहित्यकारों सहित अनेक प्रबुद्धजन शामिल हुए।
पुस्तक के लेखक विश्वनाथ तंवर ने कहा कि ‘मैं और मेरा सरदारशहर’ के माध्यम से शहर के अतीत और वर्तमान को जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसमें ऐतिहासिक घटनाओं के साथ शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने वाली विभूतियों के जीवन प्रसंगों को भी स्थान दिया गया है। पुस्तक में उन व्यक्तित्वों का उल्लेख भी है, जो वर्तमान समय में शहर के विकास और सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।
तंवर ने बताया कि पुस्तक में उनके निजी अनुभवों, देखी-सुनी घटनाओं और जीवन से जुड़े प्रसंगों को संस्मरणों एवं सच्ची कहानियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन घटनाओं के माध्यम से पाठकों को सामाजिक परिस्थितियों, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विविध पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा। पुस्तक केवल एक शहर का परिचय नहीं, बल्कि उससे जुड़ी स्मृतियों, व्यक्तित्वों और सामाजिक जीवन को संजोने का प्रयास है।
नई पीढ़ी तक पहुंचेगी शहर की विरासत
कार्यक्रम के अध्यक्ष मोहनलाल डागा ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र की विभूतियों के योगदान को सामने लाने वाली ऐसी कृतियां शहर की पहचान और समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शहर के विकास और सामाजिक कार्यों में योगदान देने वाले लोगों के जीवन प्रसंग पाठकों को प्रेरित भी कर सकते हैं।
समारोह में मुख्य अतिथि लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ तथा विशिष्ट अतिथि हरिवाणी, डॉ. आरती वर्मा, पं. बालकृष्ण कौशिक, सुनीता डिसूजा और डॉ. विजय सिंह नाहटा मौजूद रहे। स्वागत भाषण मोनिका डागा ने दिया। साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों की सहभागिता के बीच पुस्तक के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर चर्चा हुई।
‘मैं और मेरा सरदारशहर’ सरदारशहर की स्मृतियों, ऐतिहासिक घटनाओं और समाज के लिए योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को शब्दों में सहेजने की दिशा में एक साहित्यिक प्रयास है।

















