जयपुर। सीकर रोड स्थित नींदड़ में आयोजित 10 दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के आठवें दिन तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि जब तक सांस चलेगी, सनातन धर्म के अभय युद्ध के लिए चलेगी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का स्वरूप विराट है, जिसमें संपूर्ण सृष्टि और ब्रह्मांड का कल्याण समाहित है। हर व्यक्ति का सम्मान करना और सबकी चिंता करना ही धर्म का मूल भाव है।
महाराज ने कहा कि सत्य, अहिंसा, परोपकार और सभी जीवों में ईश्वर के दर्शन पर आधारित सनातन धर्म एक शाश्वत एवं सार्वभौमिक जीवन पथ है, जो व्यक्तिगत ही नहीं बल्कि सामूहिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। हनुमान जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हनुमान धर्म रथ हैं, जिनकी पीठ पर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण विराजमान हैं। धर्म रथी कभी पराजित नहीं होता।
उन्होंने कहा कि कोई भी कर्म या अनुष्ठान ईश्वर के भजन के बिना पूर्ण नहीं होता। कर्म और ज्ञान भजन के बिना नष्ट हो जाते हैं, जबकि भगवान का भजन कभी नष्ट नहीं होता। भजन का अर्थ केवल भगवान को भजना ही नहीं, बल्कि दिव्यता का रसास्वादन करना भी है। संस्कृत को संस्कृति की आत्मा बताते हुए महाराज ने कहा कि संस्कृत के बिना संस्कृति का सम्यक ज्ञान संभव नहीं है।
इस अवसर पर कथा श्रवण के लिए पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव की उपस्थिति में जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज द्वारा रचित ‘अंधति महाकाव्य’ सहित नारद भक्ति सूत्र समेत चार ग्रंथों का लोकार्पण किया गया। महाराज अब तक 377 ग्रंथों की रचना कर चुके हैं।
योग गुरु बाबा रामदेव ने महाराज को सनातन और राष्ट्र का गौरव बताते हुए कहा कि उनकी वाणी में स्वयं मां सरस्वती का वास है और वे राष्ट्र के उद्धारक हैं। उन्होंने संस्कृत श्लोकों के माध्यम से महाराज को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं।
कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल ने ‘हार गया मैं बाबा अब तो दामन थाम ले’, ‘हारा हूं बाबा मुझे तुझपे भरोसा है’ और ‘भर दो झोली मेरी’ जैसे भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर जयकारों और नृत्य में लीन हो गए।
आयोजन समिति के अनुसार शुक्रवार को आयोजित 1008 कुण्डीय हनुमत महायज्ञ एवं श्रीराम कथा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कथा श्रवण कर तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद ग्रहण करेंगी। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, योग गुरु बाबा रामदेव, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है।




















