जयपुर। राजस्थान में निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रही। सरकार की ओर से वार्ता की कोई पहल नहीं होने के कारण बस ऑपरेटरों का धैर्य जवाब दे रहा है और अब यह आंदोलन शांतिपूर्ण से उग्र रूप अख्तियार करने लगा है। राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर में करीब 35 हजार बसों के पहिए थमे रहने से आम जनता, परीक्षार्थी और फाल्गुन मेले में जा रहे श्रद्धालु बेहाल हैं।
वहीं जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर गुरुवार को प्रदर्शन का हिंसक चेहरा सामने आया। हड़ताली ऑपरेटर्स ने जबरन निजी बसें रुकवाई और नियमों की अवहेलना कर बस चलाने वाले चालक-परिचालकों के साथ धक्का-मुक्की की। दौसा के महुआ में प्रदर्शनकारियों ने एक बस कंडक्टर को जबरन नीचे उतारकर जूतों की माला पहना दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। अलवर में भी ऑपरेटरों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
इधर वर्तमान में खाटू श्याम जी का लक्खी फाल्गुन मेला चल रहा है, जहां लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बसों की अनुपलब्धता के कारण श्रद्धालुओं को भारी असुविधा हो रही है। दूसरी ओर, होली का पर्व नजदीक होने के कारण घर जाने वाले प्रवासी श्रमिक और यात्री बस अड्डों पर फंसे हुए हैं। बीकानेर के नापासर में हृदयविदारक स्थिति दिखी, जहां परीक्षा केंद्र जाने के लिए साधन न मिलने पर छात्राएं सड़क पर ही फूट-फूटकर रोने लगीं।
ऑल राजस्थान कांटेक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मदन यादव का कहना है कि वे संवाद के पक्षधर हैं, लेकिन सरकार की चुप्पी ने असंतोष पैदा कर दिया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण साहू ने चेतावनी दी है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं,हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि इस हड़ताल से न केवल जनता परेशान है, बल्कि सरकार को भी टोल और डीजल वैट के रूप में करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
बस संगठनों का आरोप है कि सरकार वार्ता के बजाय प्रशासनिक दबाव से आंदोलन को कुचलना चाहती है। ऑपरेटरों के अनुसार यह व्यवसाय हजारों परिवारों का आधार है, जिन पर अब संकट मंडरा रहा है।



















