जयपुर। छोटी काशी के रूप में विख्यात जयपुर में मंगलवार को महानवमी और विजयदशमी के अवसर पर आस्था और भक्ति का माहौल रहा। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों से लेकर घरों तक धार्मिक अनुष्ठान हुए। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन, कन्या-बटुक पूजन और शस्त्र पूजन किया गया। वहीं, घर-घर में देवी स्वरूपा कन्याओं का पूजन कर श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं और माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आमेर शिला माता मंदिर में शस्त्र पूजन
ऐतिहासिक आमेर स्थित शिला माता मंदिर में विजयादशमी का पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया। पुजारी बनवारी लाल शर्मा ने मंदिर में रखे पारंपरिक शस्त्रों का विधि-विधान से पूजन किया। मंदिर में नवरात्र से जुड़े अनुष्ठानों की श्रृंखला के तहत 21 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे नवरात्र उत्थापना का कार्यक्रम होगा।
शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी महानवमी के हवन-पूजन के बाद दशमी तिथि के विशेष अनुष्ठान हुए। दुर्गापुरा स्थित दुर्गा माता मंदिर, घाटगेट स्थित काली माता मंदिर, झालाना डूंगरी स्थित कालका माता मंदिर, राजापार्क स्थित वैष्णो देवी मंदिर और पुरानी बस्ती स्थित चंद्रघंटेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर मां भगवती का आशीर्वाद लिया।
मनसा माता मंदिर में कन्या-बटुक पूजन और हवन
ठिकाना मंदिर श्री गोविंद देव जी के कनक घाटी, आमेर रोड स्थित अधीनस्थ मंदिर श्री देवी मनसा माता में भी नवरात्र महोत्सव के तहत विशेष आयोजन हुए। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में श्रवण नक्षत्र के दौरान महानवमी पूजन किया गया। इस अवसर पर देवी स्वरूपा कन्याओं और बटुकों का पूजन कर उन्हें उपहार भेंट किए गए। प्रभु श्रीराम और हनुमान जी के विशेष पूजन के बाद पूर्णाहुति के साथ हवन संपन्न हुआ।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, उत्सव की श्रृंखला में 21 अक्टूबर को धनिष्ठा नक्षत्र के दौरान सुबह 10:47 बजे तक अपराजिता पूजन का विधान पूरा किया जाएगा।
घरों में कन्याओं के चरण पखारकर लिया आशीर्वाद
महानवमी और विजयादशमी के अवसर पर अवकाश होने के कारण शहर के अधिकांश परिवारों ने मंगलवार को ही कन्या-बटुक पूजन किया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनके चरण पखारे, चुनरी ओढ़ाई और विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाया गया। भोजन के बाद कन्याओं और बटुकों को दक्षिणा व उपहार भेंट किए गए और पैर छूकर आशीर्वाद लिया गया।
जरूरतमंद बच्चों तक भी पहुंचीं पर्व की खुशियां
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शहर में सेवा और सामाजिक सरोकार की पहल भी देखने को मिली। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहरवासियों ने कच्ची बस्तियों में पहुंचकर जरूरतमंद बच्चों और परिवारों को भोजन व प्रसाद वितरित किया। इस पहल के माध्यम से पर्व की खुशियां समाज के जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
मंदिरों में पूजा-अर्चना, घरों में कन्या पूजन और जरूरतमंदों की सेवा के साथ जयपुर में महानवमी और विजयादशमी श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक सद्भाव के वातावरण में मनाई गई।

















