नेट थियेट पर नाटक सच्ची श्रद्धा-भक्ति की जीत

जयपुर। नेट थियेट कार्यक्रमों की श्रृंखला में महिला जागृति संघ की ओर से शशि जैन द्वारा लिखित और राजेंद्र शर्मा राजू द्वारा निर्देशित नाटक सच्ची श्रद्धा -भक्ति की जीत का सशक्त मंचन किया गया। नेटथियेट के राजेन्द्र शर्मा राजू ने बताया कि नाटक में बताया गया कि णमोकार मंत्र की जाप और सच्ची श्रद्धा से जिन प्रभु की आराधना करोगे तो आपके जीवन में सुख, शांति और किसी प्रकार क दुख दर्द भी आपके समीप नहीं रहते ।

कथासार

पटना शहर में जिनदत्त सेठ और सेठानी और उनकी सुंदर लड़की सोमा रहती थी ।सोमा धर्म में सच्ची श्रद्धा व अटुट विश्वास रखने वाली थी,बचपन से ही धार्मिक संस्कारों में रची पली थी, जब वह 16 वर्ष की हुई तो सेठानी को शादी की चिंता सताने लगी, बहुत धूमधाम से सेठ सोमदत्त के बेटे सोम से शाही‌ ठाठबाट से शादी संपन्न होती है और सोमा अपनी ससुराल पहुंचती है, क्योंकि सोमा ने माताजी से नित्य देव दर्शन और रात्रि भोजन का त्याग का नियम ले‌ रखा था, उसके ससुराल में सास और ससुर और पति सोम द्वारा जैन धर्म महत्वपूर्ण विश्वास रखने वाली सोमा के देव दर्शन और रात्रि भोजन त्याग का विरोध करते हैं,उस पर जुल्म करते हैं, पति सोम के द्वारा नाग से डसवाकर सोमा‌‌ को मारने की योजना बनाई जाती है, लेकिन सोमा की सच्ची भक्ति से जब सोमा नाक को पहनती है तो वह फूलों की माला बन जाती है और जब वह अपने पति को उसे माला को पहनाती है तो वह सांप बन जाता है और पति को डस लेता है।

न्याय के लिए राजा के पास जाने पर राजा द्वारा जब सोमा से कहा जाता है कि वह अपनी भक्ति से क्या इसे जिंदा कर सकती है तब सोमा णमोकार मंत्र का जाप करती है और जिन प्रभु से अपने पति के जिंदा करने की प्रार्थना करती है, भक्ति के प्रभाव से ‌ उसका पति जिंदा हो जाता है, राजा जब तीनों को दोषी मानते हुए सजा देते हैं तो सोमा के कहने पर राजा उन्हें क्षमा करते हैं, राजा ने अपने नगर में यह घोषणा करवाई की से हमारा जैन धर्म की राजधर्म होगा । सास ससुर के कहने पर की बेटी अब घर चलो। सोमा ने कहा कि वह अब घर नहीं जाएगी और आर्यिका दीक्षा लेने का प्रण लेती है । इस तरह सच्ची श्रद्धा व भक्ति की जीत होती है ।

नाटक में निर्मला वेद, निर्मला गंगवाल, शारदा सोनी,ज्योति छाबड़ा, सोनिया जैन ने अपने अभिनय से इस नाटक को साकार किया ।इसके अलावा अंजू जैन, सरोज जैन बेला, गरिमा बाकलीवाल, रेखा गोधा, मंजू पाटनी, रेणु जैन, मानसी जैन और काशवी जैन ने अपने अभिनय से इस नाटक को जीवंता प्रदान की । नाटक में सरोज छाबड़ा, कुसुम ठोलिया और साधना काला ने गायन पक्ष को संभाला । बाल कलाकार रति जैन और प्रार्थना जैन ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी। कार्यक्रम संयोजक नवल डांगी, कैमरा मनोज स्वामी, प्रकाश व्यवस्था जीवितेश शर्मा व मंच व्यवस्था अंकित शर्मा नोनू की रही।

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