जयपुर। अगस्त माह धर्म, आस्था और व्रत-त्योहारों की श्रृंखला लेकर आया है। श्रावण की पूर्णिमा से भाद्रपद मास की शुरुआत तक हिंदू पंचांग के अनुसार कई व्रत और पर्व रहेंगे।
पंडित श्रीकृष्ण चंद्र शर्मा ने बताया कि शुभ तिथियों पर व्रत-उपवास, दान-पुण्य और साधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। सनातन संस्कृति में तिथि, वार, नक्षत्र और योग का विशेष महत्व होता है, जो हमारे जीवन को सूक्ष्म रूप से प्रभावित करते हैं। इसलिए धार्मिक तिथियों पर विशेष पूजन-विधान का पालन करना आवश्यक माना गया है।
पुत्रदा एकादशी-पांच अगस्त:
भगवान विष्णु की आराधना से संतान सुख की प्राप्ति होती है। वहीं मंगला गौरी व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य सुख के लिए महिलाएं करती हैं।
प्रदोष व्रत-छह अगस्त:
प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र चढ़ाकर भगवान शिव की आराधना करें। यह दिन नए कार्य की शुरुआत के लिए भी उत्तम है।
सावन व्रत पूर्णिमा- 8 अगस्त
स्नान, दान और ब्राह्मण भोजन का विशेष महत्व। इस दिन श्रद्धालु नदी, जलाशयों में स्नान का महत्व है।
रक्षाबंधन- नौ अगस्त:
रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, अत: दिन भर शुभ समय रहेगा। बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें और परिवारजन इष्टदेव को भी राखी अर्पित करें।
कजरी तीज-12 अगस्त: विवाहित महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा करें, गणेशजी का व्रत रखें और सुख-सौभाग्य की कामना करें।
बलराम जयंती- 14 अगस्त:
कृष्ण के बड़े भाई बलराम की जयंती पर कृषक वर्ग हल की पूजा करते हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी- 16 अगस्त:
रात्रि 12 बजे तक भजन, कीर्तन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएं। उपवास रखें और घर में दीप सजाएं।
सिंह संक्रांति- 17 अगस्त:
सूर्य देवता की पूजा करें, नई योजनाओं की शुरुआत के लिए दिन अत्यंत शुभ।
अजा एकादशी-19 अगस्त:
भगवान विष्णु की कृपा के लिए यह एकादशी व्रत करें। इससे शांति और आर्थिक उन्नति मिलती है।
अमावस्या-22-23 अगस्त:
पितृ तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध का विशेष महत्व। पितरों की शांति और आशीर्वाद के लिए श्राद्ध कर्म करें।
हरतालिका तीज- 26 अगस्त:
सुहागिन महिलाएं शिव-पार्वती की आराधना करें। यह व्रत अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है।
गणेश चतुर्थी-27 अगस्त:
घर में गणपति बप्पा की स्थापना करें, विधिवत पूजन के साथ 10 दिवसीय उत्सव की शुरुआत करें।
ऋषि पंचमी-28 अगस्त:
सप्त ऋषियों की पूजा एवं व्रत के माध्यम से ऋषि परंपरा को नमन करें। यह दिन पवित्रता और आत्मशुद्धि के लिए विशेष माना गया है।




















