मणिहारों के कटला में लगी आग: 25 दुकानों तक पहुंची आग की लपटें

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जयपुर। माणक चौक थाना क्षेत्र स्थित त्रिपोलिया बाजार के मणिहारों के कटला (पुरोहितजी का कटला) में गुरुवार सुबह करीब 7 से 7:30 बजे तीन मंजिला सेठी कॉम्प्लेक्स में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। आग कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल स्थित दुकानों और गोदामों तक फैल गई। चूड़ी, मणिहारी सामान, कपड़े, रेडीमेड आइटम, कॉस्मेटिक, प्लास्टिक, खिलौने और ज्वेलरी सहित बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामान होने से आग तेजी से फैलती गई। करीब 25 दुकानें आग की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 15 से 20 दुकानों में भारी नुकसान बताया जा रहा है।

आग बुझाने के लिए जयपुर के विभिन्न फायर स्टेशनों से 25 से 30 दमकल वाहन मौके पर भेजे गए। 20 से अधिक सिविल डिफेंस कर्मचारी भी राहत और बचाव कार्य में जुटे रहे। संकरी गलियों के कारण दमकल वाहन कॉम्प्लेक्स तक सीधे नहीं पहुंच सके। ऐसे में मुख्य सड़क पर खड़ी दमकलों से सैकड़ों मीटर लंबे पाइप गलियों के भीतर ले जाकर पानी की बौछार की गई। निजी पानी के टैंकरों से भी पानी मंगवाया गया। दोपहर तक करीब 18 दुकानों की आग पर काबू पाने की जानकारी दी गई, लेकिन कई दुकानों से धुआं उठता रहा और दमकलकर्मी कूलिंग का काम करते रहे।

सुबह का समय होने से टली जनहानि

हादसे के समय बाजार बंद था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चौकीदार विक्रम सिंह ने दुकानों से धुआं उठता देखकर करीब 7:30 बजे व्यापारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में आग की सूचना दी। इसके बाद व्यापारी, पुलिस और दमकल दल मौके पर पहुंचे। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि समय रहते सूचना मिलने और बाजार बंद होने के कारण बड़ी जनहानि टल गई।

स्थानीय दुकानदार प्रकाश के अनुसार सेठी कॉम्प्लेक्स में ग्राउंड, प्रथम और द्वितीय तल मिलाकर 150 से अधिक दुकानें हैं। दूसरी मंजिल की करीब 15-20 दुकानों में रेडीमेड कपड़े, कॉस्मेटिक, ज्वेलरी और अन्य सामान रखा था। त्योहारों के सीजन को देखते हुए कई दुकानदारों ने हाल ही में नया स्टॉक मंगवाया था, जो आग में जल गया।

गोदाम में फंसे गार्ड-सफाईकर्मी, ताला तोड़कर निकले

गार्ड विक्रम सिंह ने बताया कि छोटू भाई के मणिहारी सामान के गोदाम में आग लगी थी। उस समय वह तीन सफाईकर्मियों के साथ अंदर था। आग बढ़ने पर उन्होंने ताला तोड़ा और शटर उठाकर बाहर निकलकर जान बचाई। शटर गर्म होने के कारण विक्रम का हाथ भी झुलस गया। उसके अनुसार दुकानों और बरामदों में बड़ी मात्रा में रखा सामान आग फैलने का प्रमुख कारण बना।

पांच कॉमर्शियल सिलेंडर हटाए, टला बड़ा खतरा

कॉम्प्लेक्स में रखे पांच कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी खतरे का कारण बने। नगर निगम अजमेर के फायरमैन मुकेश बुनकर को सिलेंडरों की जानकारी मिली तो उन्होंने उन्हें तत्काल बिल्डिंग से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया। इससे संभावित बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय निवासी राजेंद्र ने आरोप लगाया कि फायर सेफ्टी अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही सिलेंडर हटाए गए थे। इस संबंध में आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

शॉर्ट सर्किट प्रारंभिक कारण, वेल्डिंग को लेकर भी आशंका

माणक चौक थानाधिकारी राकेश ख्यालिया के अनुसार प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट सामने आया है। हालांकि वास्तविक कारण और नुकसान का आकलन आग पूरी तरह बुझने के बाद जांच के आधार पर स्पष्ट होगा।

वहीं स्थानीय व्यापारी अनीस चंदवानी ने आरोप लगाया कि कॉम्प्लेक्स की ऊपरी मंजिल पर रेस्टोरेंट और होटल का निर्माण कराया जा रहा था तथा सुबह वेल्डिंग का काम होता था। व्यापारियों ने पहले भी इसका विरोध करने और नगर निगम में शिकायत करने की बात कही। कुछ व्यापारियों ने वेल्डिंग से निकली चिंगारी से आग लगने की आशंका जताई, लेकिन पुलिस की प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को कारण माना गया है। व्यापारियों ने दूसरी मंजिल पर रेस्टोरेंट संचालित होने और पूर्व में मकर संक्रांति के दौरान छत पर आग लगने की घटना का भी हवाला दिया।

फायर सिस्टम और एनओसी पर उठे सवाल

आग के बाद कॉम्प्लेक्स के फायर सेफ्टी सिस्टम और फायर एनओसी को लेकर सवाल उठे। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि भवन में फायर फाइटिंग सिस्टम लगा है, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि वह प्रभावी साबित नहीं हुआ। थानाधिकारी राकेश ख्यालिया ने बताया कि भवन या दुकानों के पास फायर एनओसी थी या नहीं, इसकी जांच की जाएगी।

व्यापारियों के अनुसार पुरोहितजी के कटला में 535 से अधिक दुकानें हैं और रोजाना हजारों व्यापारी, ग्राहक व विदेशी पर्यटक आते हैं। यहां करीब 14 फायर हाइड्रेंट लगाए गए हैं, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि इनका अब तक उपयोग नहीं हुआ। जयपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 3.90 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम और पंप हाउस बनाया गया था। इसका उद्देश्य बाजारों में लगे हाइड्रेंट के जरिए तत्काल पानी उपलब्ध कराना था।

घाटगेट फायर स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर संजय बाजार, बापू बाजार, नेहरू बाजार, जौहरी बाजार, रामगंज बाजार, पुरोहितजी का कटला और घोड़ा निकास को जोड़ा गया था। व्यापारियों का आरोप है कि स्मोक डिटेक्टर, प्रेशर ट्रांसमीटर और हाइड्रेंट सिस्टम के रखरखाव के अभाव में कई उपकरण खराब हो चुके हैं। व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष मनीष ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले हाइड्रेंट लगाए गए थे। बाजार में फायर एग्जिट की व्यवस्था भी नहीं है।

परकोटे में फायर सिस्टम की जांच की मांग

मौके पर पहुंचे किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने परकोटे में अवैध कब्जों और निर्माणों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि करीब पौने तीन साल में प्रशासन ने फायर सिस्टम की एक बार भी जांच नहीं की। उन्होंने परकोटे में जारी फायर एनओसी की दोबारा जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि 19 नवंबर को इसी तरह के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को बुलाया है और वे सरकार व प्रशासन को लगातार पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।

हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने अवैध होटल निर्माण की शिकायतों की जांच की मांग की और सवाल उठाया कि यदि फायर सिस्टम प्रभावी नहीं था तो फायर एनओसी कैसे जारी हुई। उन्होंने एनओसी जारी करने वाले अधिकारियों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की। आचार्य ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्मार्ट सिटी के तहत खर्च किए गए करोड़ों रुपए और पुराने फायर सिस्टम से जुड़े कार्यों की भी जांच की मांग की।

आचार्य ने कहा कि घटना के समय बाजार बंद होने से जनहानि नहीं हुई। आग के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में रही कमियों की विस्तृत जांच की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की बात कही।

सुभाष चौक से चांदपोल तक दिखा धुएं का गुबार

आग से उठता काला धुआं सुभाष चौक से चांदपोल तक दिखाई दिया। आसपास के लोगों ने सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायत की। एहतियात के तौर पर क्षेत्र की बिजली सप्लाई बंद की गई। बनीपार्क, घाटगेट, चौगान और आमेर सहित अन्य फायर स्टेशनों से दमकलें बुलाई गईं।

चार किलोमीटर क्षेत्र में यातायात प्रभावित

आग के चलते परकोटे के करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा। बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार और त्रिपोलिया बाजार में जाम के हालात बने। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर यातायात डायवर्ट किया। कटले के भीतर जाने वाले रास्तों पर पुलिस बल तैनात रहा। संकरी गलियों के कारण दमकलों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। आग की तपिश से पास की एक दुकान की दीवार भी टूटकर गिर गई।

पुरोहितजी का कटला बंद, दुकानदारों को रोका

एहतियात के तौर पर पुरोहितजी का कटला बंद रखा गया और प्रवेश द्वार पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए। दुकानदारों को दुकानें खोलने की अनुमति नहीं दी गई। बड़ी संख्या में व्यापारी और स्थानीय लोग मौके पर जमा रहे। कई दुकानदार अपनी दुकानों का सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने में जुटे रहे।

बरामदों में सामान और बंद शटर बने चुनौती

सिविल डिफेंस कर्मचारी राकेश सेन के अनुसार आग प्रभावित दुकानों के शटर तोड़कर अंदर पहुंचने का प्रयास किया गया। बरामदों में रखा सामान हटाया गया। चूड़ी, कार्टन, कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामग्री अधिक मात्रा में होने के कारण आग पर नियंत्रण पाने में परेशानी हुई। बंद दुकानों के अंदर धुआं भर जाने से रेस्क्यू और कूलिंग ऑपरेशन भी चुनौतीपूर्ण रहा।

छोटी आग के लिए 19 फायर बाइक, बड़ी आग में दमकल ही कारगर

परकोटे की तंग गलियों में छोटी आग की घटनाओं से निपटने के लिए 19 फायर बाइक उपलब्ध हैं। प्रत्येक बाइक पर दो फायर एक्सटिंग्विशर लगे होते हैं। हालांकि इस घटना में बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर आग होने के कारण फायर बाइक प्रभावी नहीं रही। सीएफओ देवेंद्र मीणा के अनुसार फायर बाइक छोटी आग के लिए उपयोगी हैं, जबकि दूसरी मंजिल पर लगी इस तरह की बड़ी आग में बड़ी दमकलों की जरूरत होती है।
आग पूरी तरह बुझाने के बाद ही नुकसान का वास्तविक आकलन हो सकेगा। फिलहाल पुलिस, नगर निगम, दमकल और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर सुरक्षा और कूलिंग कार्य में जुटी रहीं।

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