June 23, 2024, 10:10 am
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गणेश जी महाराज 14 फीट के रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले

जयपुर। ऋषि पंचमी के पावन पर्व पर गणेश जी की शोभा यात्रा निकाली गई। जिसमें शहर के लाखों की संख्या में भक्त शामिल हुए। इस शोभा यात्रा में गणेश जी के भक्तों ने जमकर बाबा के जयकारे लगाते हुए शोभा यात्रा की रोनक बढ़ाई। मोती डूंगरी गणेश मंदिर से बुधवार शाम राज्यपाल कलराज मिश्र ने यात्रा में शामिल होकर मुख्य रथ की पूजा-अर्चना की और यात्रा को मंदिर प्रागंण से बाबा के जयकारे लगाते हुए रवाना किया।

शोभा यात्रा मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर से शुरू होकर सांगानेरी गेट,जौहरी बाजार ,बड़ी चौपड़,त्रिपोलिया बाजार,गणगौरी बाजार,ब्रह्मपुरी होते हुए गढ़ गणेश मंदिर पहुंची । जहां पर मंदिर के महंत परिवार ने पूजा -अर्चना के बाद उन्हे विसर्जित कर दिया गया।

14 फीट के रथ करेंगे गणेश जी नगर भ्रमण

शोभा यात्रा की जानकारी देते हुए मोती डूंगरी मंदिर महंत ने बताया कि मोती डूंगरी गणेश मंदिर से ये 36 वीं शोभा यात्रा निकाली गई है। यात्रा में गणेश जी महाराज 14 फीट के रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकल है। इस यात्रा में कुल 86 झांकियां है,जिसमें से 28 झांकियां इलेक्ट्रॉनिक है। जिसमें भगवान गणेश की विशेष चंद्रयान की झांकी श्रद्धालुओ के आकर्षण का केंद्र रही। साथ ही झांकी में ब्रह्मांड के भी श्रद्धालुओं को दर्शन हुए।

कोलकाता से आये कारीगर

शोभा यात्रा को तैयार करने के लिए कोलकाता से कारीगर बुलाए गए थे। जिसमें कारीगरों ने मुख्य रथ को स्वर्ण मंडित चित्र से तैयार कर 14 फीट का ये रथ हुबहु मंदिर जैसा ही बनाया । शोभा यात्रा में 18 फीट के गणेश जी की झांकी ने सबको अपनी तरफ आकर्षित किया।

इस झांकी को तैयार करने में कारीगरों को तीन महीने का समय लगा। इसके अलावा चंद्रयान-3,त्रिपोलिया गेट पर गणेश जी रिद्वी-सिद्वी के साथ पृथ्वी पर नृत्य करते हुए ,शिव जी की पीठ पर बाल रूप में खेलते हुए गणेश जी ,शेष नाग पर नृत्य करते हुए गणेश जी और नीले घोड़े पर विराजमान गणेश जी ने शोभा यात्रा में भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जगह -जगह पर की पुष्प वर्षा

शोभा यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों ने सड़क के दोनो और अलग-अलग मंच बनाए जिसमें स्थानीय लोगों ने शोभा यात्रा पर गणपति बाबा की प्रतिमा पर पुष्प वर्षा की और प्रथम पूज्य गणेश जी महाराज के जयकारे लगाए। स्थानीय नेताओं ने भी शोभा यात्रा का स्वागत कर पूजा -अर्चना की। जगह जगह पर बैंड वादन कर अलग-अलग तरीके से भजन -संध्या का आयोजन हुआ।

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