जयपुर। गुलाबी नगरी में सोमवार—मंगलवार की मध्यरात्रि को होलिका दहन का पर्व श्रद्धा,उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। शहरभर में जगह-जगह चौराहों पर होली सजाई गई। जहां सभी वर्ग और हर उम्र के लोग शामिल हुए। महिलाओं ने चुंदड़ी की साड़ी पहनकर विधि-विधान से होली पूजन किया, परिक्रमा लगाई और परिवार की खुशहाली की कामना की।
वहीं राजधानी जयपुर में होलिका दहन का मुख्य आयोजन सिटी पैलेस में हुआ। यहां पूर्व राजपरिवार की ओर से पारंपरिक रीति से सबसे पहले होलिका दहन किया गया। जिसके बाद शहर के विभिन्न क्षेत्रों में होलिका दहन संपन्न हुआ। सिटी पैलेस में आयोजित समारोह में पूर्व राजपरिवार के सदस्य शामिल हुए। अबीर-गुलाल से सजी होलिका के दहन के बाद श्रद्धालुओं ने फेरे लगाकर ईश्वर से मनोकामनाएं मांगी। मध्यरात्रि के शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद होलिका दहन किया गया।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार 2 मार्च की अर्धरात्रि के बाद 3 मार्च को रात्रि 1:26 बजे से 2:37 बजे के बीच होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त था। इस दौरान लोगों ने दंगियां सेंककर अग्नि की परिक्रमा की और सुख-समृद्धि की कामना की।
कुछ स्थानों पर होलिका दहन के अवसर पर भक्त प्रहलाद की कथा का भी विशेष उल्लेख किया गया। जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने पुत्र प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के प्रयास किए, लेकिन अंततः अहंकारवश होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गई और भक्त प्रहलाद सुरक्षित रहे। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है। श्रद्धालुओं ने प्रहलाद की अटूट भक्ति से प्रेरणा लेने और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
वहीं कार्यक्रम के दौरान कई स्थानों पर डीजे की धुन पर युवा झूमते नजर आए। पूरा वातावरण उल्लास और उमंग से सराबोर रहा। बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह देखा गया। महिलाओं ने पारंपरिक आस्था के तहत दशा माता के डोरों को होली के दर्शन करवाए और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। शहर में होलिका दहन का कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।




















