जयपुर। इंडियन एकेडेमी ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजी एंड हेड-नेक सर्जरी (आईएओएचएनएस) की 12वीं कॉन्फ्रेंस का गुरुवार को एसएमएस अस्पताल के एकेडमिक भवन में हैंड्स-ऑन रोबोटिक सर्जरी प्रशिक्षण के साथ आगाज हुआ। 27 सितंबर तक चलने वाली कॉन्फ्रेंस की प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में करीब 150 विद्यार्थियों और 50 कंसल्टेंट्स ने हिस्सा लिया।
वर्कशॉप में डॉ. सतीश जैन और डॉ. संपत चंद प्रसाद राव ने कैडेवर पर एंटीरियर और लेटरल स्कल बेस की सर्जिकल तकनीकों का प्रदर्शन किया। चिकित्सकों ने नर्व मॉनिटरिंग सिस्टम का भी व्यावहारिक अभ्यास किया। इसके अलावा यूस्टेशियन ट्यूब के विकारों के उपचार के लिए बैलून डाइलेशन तकनीक, लेजर विधियों तथा 3डी सीटी/सीबीसीटी स्कैन का प्रशिक्षण दिया गया। एलर्जी की जांच के लिए स्किन प्रिक टेस्ट और चक्कर की समस्या से संबंधित जांच व उपचार की तकनीकें भी समझाई गईं।
रोबोटिक सर्जरी में बेहतर विजिबिलिटी और मूवमेंट
कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन और एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि ईएनटी और हेड-नेक सर्जरी में रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल अभी सीमित है। उनके अनुसार, करीब 1,000 थायरॉयड ऑपरेशन में संभवतः एक ऑपरेशन ही वर्तमान में रोबोटिक तकनीक से हो रहा है।
उन्होंने बताया कि रोबोटिक सिस्टम में चार आर्म्स होती हैं, जिनमें एक कैमरा होता है। इसके जरिए सर्जन शरीर के संवेदनशील और कठिन हिस्सों को अलग-अलग कोणों से बेहतर तरीके से देख सकता है। आर्म्स से पकड़ने, काटने और कोगुलेशन जैसे कार्य किए जा सकते हैं। रोबोटिक आर्म 360 डिग्री तक घूम सकती है, जिससे सूक्ष्म कार्यों में अधिक मूवमेंट मिलता है।
डॉ. सिंघल के अनुसार मैनुअल सर्जरी में हाथों का हल्का कंपन संवेदनशील क्षेत्रों, नसों या बड़ी रक्त धमनियों के आसपास चुनौती बन सकता है, जबकि रोबोटिक सिस्टम में कंसोल से दिए गए निर्देशों के अनुसार उपकरण संचालित होते हैं।
लागत और प्रशिक्षण बड़ी चुनौती
डॉ. सिंघल ने रोबोटिक सर्जरी में बेहतर विजिबिलिटी, मूवमेंट और संभावित रूप से कम जटिलताओं को प्रमुख लाभ बताया, वहीं सीमित उपलब्धता और अधिक लागत को बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा कि एक ही रोबोट का यूरोलॉजी, गायनेकोलॉजी, ईएनटी सहित विभिन्न विभागों में साझा उपयोग किया जाए तो लागत का प्रभाव कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी सीखने के लिए कैडेवर और अन्य व्यावहारिक कार्यशालाएं महत्वपूर्ण हैं। ऐसी वर्कशॉप में डॉक्टरों को टेम्पलेट्स और कैडेवर पर अभ्यास के जरिए तकनीक समझने का अवसर मिलता है। वर्कशॉप में चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने ईएनटी उपकरणों की तकनीकी बारीकियां भी जानीं।



















