जयपुर। मानसरोवर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अवैध वसूली के मामले में कैफे संचालक और तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच के अनुसार कैफे संचालक ने अपने दोस्त से पैसे लेने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर प्लान बनाया था। प्लानिंग के तहत पुलिस वालों ने दोस्त को डरा-धमकाकर उससे रुपए मंगवाए थे। मामले में रुपए लेकर फरार आरोपी की तलाश कर रही है।
पुलिस उपायुक्त जयपुर (दक्षिण) राजर्षि राज ने बताया कि मानसरोवर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अवैध वसूली मामले में आरोपी पवन कुमार गुर्जर (36) निवासी नदबई जिला भरतपुर हाल रजत पथ मानसरोवर, बाबूलाल मीणा (40) निवासी श्यामपुरा चंदवाजी जयपुर ग्रामीण, कैलाश चन्द (37) निवासी श्रीमाधोपुर जिला सीकर और अनिल कुमार रागेरा (38) निवासी बानसूर जिला अलवर को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी पवन कुमार गुर्जर रजत पथ पर कैफे चलाता है। आरोपी बाबूलाल मीणा व अनिल कुमार रागेर मानसरोवर थाने में पुलिस कांस्टेबल और आरोपी कैलाश चन्द नारायण विहार थान का पुलिस कांस्टेबल है। जहां अवैध वसूली में भूमिका मिलने पर चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। रुपए लेकर भागे इनके साथी की तलाश में पुलिस टीम दबिश दे रही है।
गौरतलब है कि मानसरोवर थाने में 31 दिसम्बर को परिवादी गोपाल सिंह गुर्जर ने मामला दर्ज करवाया था कि वह अपने दोस्त योगेश पटेल के साथ उसकी थार गाड़ी में भारत माता सर्किल वाली रोड पर घूम रहा था। वहां पुलिसकर्मियों ने गाड़ी रुकवाया और धमकाया कि तुम उल्टा-सीधा काम करते हो और जॉब से सस्पेंड करवा देंगे। वो रुपयों की डिमांड करने लगे। पुलिसकर्मियों ने योगेश को उसके हॉस्टल भेजकर छोटे भाई से पैसे मंगवाए।
पुलिस वाले उसे अपनी गाड़ी में लेकर बैठे रहे। योगेश रुपए लेकर स्वर्ण गार्डन के सामने आया। तब दो पुलिसकर्मी उसे कहीं दूर लेकर चले गए। 20 मिनट बाद दोनों पुलिस वाले आकर बोले- हमें तेरे दोस्त ने कुछ नहीं दिया है।
इसके बाद स्वर्ण पथ की तरफ घुमा कर वापस मेट्रो स्टेशन के पास लेकर खड़े हो गए। कुछ देर बाद कहा कि तेरे दोस्त योगेश से बात हो गई, हमें पैसे मिल गए। उसके बाद ऑटो रिक्शा में बैठाकर उसे छोड़ दिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि परिवादी गोपाल सिंह और उसके दोस्त योगेश पटेल के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर झगड़ा चल रहा है। योगेश को पता था कि गोपाल के पास पैसे आए हुए है, जो पीजी हॉस्टल में रखे है।
तब योगेश ने कैफे चलाने वाले अपने चचेरे भाई पवन कुमार गुर्जर के परिचित पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर प्लान बनाया। प्लानिंग के तहत योगेश खुद अपनी थार गाड़ी में बैठाकर परिवाद को घुमाने ले गया। नाटकीय तरीके से पीजी से पैसे लेकर फरार हो गया। पुलिस मामले में फरार आरोपी की तलाश कर रही है और अवैध वसूली से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है।



















