टेडएक्स आईआईएम संबलपुर के कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियों ने साझा किए कामयाबी के मंत्र

संबलपुर। देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में से एक आईआईएम संबलपुर में टेडएक्स टॉक्स के तहत विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित और अग्रणी लोगों ने विद्यार्थियों के बीच चर्चा करते हुए अपने संघर्ष और अपनी कामयाबी से जुड़े विविध पहलुओं का खुलासा किया। प्रतिष्ठित वक्ताओं ने ‘One More (S)mile’ थीम के तहत अपना विजन छात्रों के सम्मुख साझा किया और बताया कि किस तरह उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद वास्तविक सफलता का अनुभव किया। डॉ. सरिता मिश्रा कोल्हे, आईआरएस, प्रधान आयकर आयुक्त, संबलपुर ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

विभिन्न क्षेत्रों के अग्रणी लोगों ने अपने ज्ञान और सफलता के मंत्र छात्रों से साझा किए। इनमें बेस्टसेलिंग लेखक और सोशल इन्फ्लूएंसर निखिल चांदवानी, एक दूरदर्शी मार्केटिंग लीडर और बिजनेस रणनीतिकार नमिता तिवारी, मास्टर एनएलपी और सम्मोहन चिकित्सा प्रशिक्षक मृणाल चक्रवर्ती, प्रसिद्ध कॉस्मेटिक स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरक्षित बतिना, अग्रणी मार्केटियर देवन भल्ला और इमामी लिमिटेड के एवीपी और एक प्रमाणित ईएसजी विशेषज्ञ अंकुर चतुर्वेदी के नाम प्रमुख हैं।

इस कार्यक्रम में भारतीय सीनियर राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान श्रद्धांजलि सामंतराय, भारतीय नौसेना में कमांडर और हथियार विशेषज्ञ कमांडर रंजन भट्टाचार्य, और जिन्होंने संसद में भाषण देने वाले ओडिशा के स्टूडेंट आइकन अनमोल अंकिता जैसे वक्ता भी शामिल थे।

आईआईएम संबलपुर के डायरेक्टर महादेव जायसवाल ने कहा, ‘‘टेडएक्स आईआईएम संबलपुर सिर्फ एक रूटीन का प्रोग्राम नहीं है; बल्कि यह एक गहन अनुभव है जो विचारों को उजागर करता है, दिमागों को प्रेरित करता है और इनोवेशन की ताकत का जश्न मनाता है। विभिन्न क्षेत्रों के वक्ताओं की एक विविध श्रृंखला के साथ, यह कार्यक्रम बौद्धिक जिज्ञासा जगाता है और छात्रों के बीच सार्थक संबंधों को बढ़ावा देता है।

इस तरह यह प्रोग्राम उन्हें अपने सामने मौजूद आसमान को और व्यापक बनाने, उनकी धारणाओं को चुनौती देने और जटिल मुद्दों की अधिक सूक्ष्म समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस दौरान विद्यार्थियों को विचारोत्तेजक बातचीत से लेकर नेटवर्किंग के अवसर भी मिलते हैं। इन अर्थों में यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म भी बन जाता है जहां व्यक्ति ज्ञान साझा कर सकते हैं, धारणाओं को चुनौती दे सकते हैं और सकारात्मक बदलाव लाने वाली पहलों पर सहयोग कर सकते हैं।’’कार्यक्रम के दौरान संकाय सदस्य, कर्मचारी, आमंत्रित अतिथि और बड़ी संख्या में छात्र भी उपस्थित थे।

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