जयपुर। केरल समाज की ओर से बुधवार को मकर विलक्कू महोत्सव मनाया जाएगा। गोपालपुरा और खातीपुरा स्थित अय्यप्पा मंदिरों में शबरिमला की परंपरा के अनुरूप विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। संक्रांति की संध्या महादीपाराधना के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इसके बाद श्री अय्यप्पा भजना समिति एवं आमंत्रित कलाकारों द्वारा भरतनाट्यम, मोहिनियाट्टम, सेमी क्लासिकल नृत्य, कथक, कैकोट्टिकली तथा तिरूवातिराकली की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दी जाएंगी। भक्तिमय वातावरण में स्वामी शरणम् अय्यप्पा शरणम् के जयघोष के साथ महोत्सव अपने चरम पर पहुंचेगा।
इससे पूर्व मंगलवार को मकर विलक्कू महोत्सव की पूर्व संध्या पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। खातीपुरा स्थित अय्यप्पा मंदिर में सुबह पल्लिउणरत के बाद अष्ट द्रव्य महागणपति हवन किया गया। दिन भर भगवान अय्यप्पा का दूध, घी, शहद, नारियल जल एवं अन्य द्रव्यों से अभिषेक हुआ। संध्या काल में पुष्पालंकार, फूलों की रंगोली और चुट्ट विलक्कु के साथ महाआरती की गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर में 1008 दीपों से चुट्टविलक्कु तथा 108 दीपों की दीपास्थम्भम प्रज्वलित की गई।
वहीं गोपालपुरा स्थित अय्यप्पा मंदिर में तीन दिवसीय 41वीं प्राण प्रतिष्ठा समारोह एवं मकर विलक्कू महोत्सव का शुभारंभ पल्लि उणरत से हुआ था। हरिनाम कीर्तन, अष्ट द्रव्य महागणपति हवन, आष्टा अभिषेक और भगवान अय्यप्पा के विविध द्रव्यों से अभिषेक किए गए। शाम को कृष्णाम्बा नृत्य कलाक्षेत्र एवं बालागोकुलम के कलाकारों ने भरतनाट्यम, मोहिनियाट्टम, सेमी क्लासिकल नृत्य एवं बाल नाट्य की प्रस्तुति दी। रात्रि में शयन आरती के बाद प्रसादी का वितरण किया गया।




















