पंचतत्व में विलीन हुए गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी

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जयपुर। ठाकुर श्री राधा गोविंद देवजी मंदिर के महंत श्रीमन् माध्व गौड़ेश्वराचार्य श्रील अंजन कुमार गोस्वामी रविवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अहोई अष्टमी के दिन उनके देवलोकगमन से गोविंद देवजी के भक्तों, वैष्णव समाज और संत-महंतों में शोक की लहर छा गई। आमेर रोड स्थित कनक घाटी के ठिकाना मंदिर श्री राधा गोविंद देवजी के मोक्षधाम समाधबाड़ी में उनके पुत्र मानस गोस्वामी ने मुखाग्नि दी। उनका अंतिम संस्कार पिता श्रील प्रद्युम्न कुमार गोस्वामी की छतरी के समीप किया गया।

महंत अंजन कुमार गोस्वामी की अंतिम यात्रा हवामहल के सामने स्थित उनकी पैतृक हवेली से रवाना हुई। गोविंद परिकर हरिनाम संकीर्तन करते हुए चल रहे थे। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी। हवामहल बाजार के व्यापारियों ने भी अपने प्रतिष्ठान से बाहर आकर पार्थिव देह को नमन किया। अंतिम यात्रा के दौरान वातावरण हरिनाम संकीर्तन से गूंजता रहा। सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा सहित विभिन्न मंदिरों के संत-महंत, आचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु अंतिम संस्कार में शामिल हुए। सभी ने पार्थिव देह पर चादर और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

सुबह किए थे ठाकुरजी के दर्शन

श्रील अंजन कुमार गोस्वामी रविवार सुबह नियमित रूप से ठाकुर श्री गोविंद देवजी मंदिर में श्रृंगार झांकी के दर्शन करने पहुंचे थे। करीब एक घंटे मंदिर में रहने के बाद वे हवेली लौट गए। वहां कुर्सी पर बैठे हुए थे और पास में उनके पुत्र मानस गोस्वामी भी मौजूद थे। इसी दौरान वे अचानक बेहोश हो गए। परिजन उन्हें तत्काल दुर्लभजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। वे 78 वर्ष के थे। उनके परिवार में धर्मपत्नी इन्द्राणी देवी गोस्वामी, पुत्र मानस गोस्वामी, पुत्री, पोती और नाती हैं।

पिता की परंपरा और सेवा पद्धति को आगे बढ़ाया

श्रील अंजन कुमार गोस्वामी का जन्म 6 जून 1949 को ज्येष्ठ शुक्ल गंगा दशमी के दिन हुआ था। वे अपने पिता श्रील प्रद्युम्न कुमार गोस्वामी के ज्येष्ठ पुत्र थे। पिता के नित्यलीला में प्रवेश के बाद वे श्रील रूप गोस्वामी द्वारा स्थापित गोस्वामी गद्दी पर विराजमान हुए। उन्होंने ठाकुर श्रीजी की सेवा और पिता की आज्ञा को सदैव सर्वोपरि रखा। पिता के बताए मार्ग पर चलते हुए उन्होंने सत्संग भवन की परिकल्पना को साकार किया।

उनके मार्गदर्शन में ठिकाना श्री गोविंद देवजी मंदिर के श्रीधाम वृंदावन, कामां (भरतपुर) और जयपुर स्थित अधीनस्थ मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया गया। मंदिरों को संप्रदाय की सेवा पद्धति के अनुरूप सुव्यवस्थित करने के साथ धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सेवा, उपदेश और व्यक्तित्व ने संप्रदाय की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

संत-महंतों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

अंतिम संस्कार में महंत सुदर्शनाचार्य, पंडित राजकुमार चतुर्वेदी, अमरापुरा के मोनू महाराज, प्रवीण बड़े भैया, महंत त्रिविक्रमाचार्य, खोले के हनुमानजी मंदिर के गिरधारी लाल शर्मा, महामंत्री बीएम शर्मा, महंत जय महाराज, महंत संजय गोस्वामी और गढ़ गणेश मंदिर के पार्थ मेहता सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे। गोविंद परिकर और वैष्णव समाज के लोगों ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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